आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से बढ़ाये जाने पर केंद्र पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आम जनता का ‘‘आर्थिक शोषण’’ किया जा रहा है।
राकांपा (शप) के प्रवक्ता महेश तापसे ने संवाददाताओं से कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी से किसानों, ट्रांसपोर्टर और छोटे व्यापारियों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जो पहले से ही बड़े पैमाने पर महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।
सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2.61-2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जो दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बार की गई है। इसके बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना।
तापसे ने कहा, ‘‘हर बार जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका बोझ किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है। सब्जियों की कीमतें बढ़ जाती हैं, परिवहन का खर्च बढ़ जाता है, स्कूल की फीस बढ़ जाती है और घर का बजट बिगड़ जाता है। भाजपा सरकार लोगों से जिंदा रहने के लिए भारी कीमत वसूल रही है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा नागरिकों को नहीं दिया और इसके बजाय उत्पाद शुल्क और अन्य करों के जरिये बड़ा राजस्व कमाया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तो क्या लोगों को राहत मिली? नहीं। सरकार ने जनता से करोड़ों रुपये इकट्ठा किए लेकिन नागरिकों को कुछ भी वापस नहीं दिया। अब, जैसे ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें थोड़ी बढ़ती हैं, पूरा बोझ तुरंत लोगों पर डाल दिया जाता है। यह शासन नहीं है - यह संगठित आर्थिक शोषण है।’’