Municipal elections: Voluntary organisation releases 'Marathinama', demands priority for Marathi candidates
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों से पहले एक स्वयंसेवी समूह ने मतदाताओं और नगर प्रशासन के लिए ‘मराठीनामा’ शीर्षक से एक विस्तृत चार्टर जारी किया, जिसमें मराठी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने, नगर निकाय के कामकाज में मराठी भाषा का अनिवार्य इस्तेमाल और स्थानीय मराठी युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर अवसर देने की मांग की गई है।
‘मराठी अभ्यास केंद्र’ नामक समूह ने यह भी मांग की कि निकाय अनुबंधों, नौकरियों, वेंडिंग लाइसेंसों और व्यावसायिक मंजूरियों से कम से कम 80 प्रतिशत मराठी बोलने वाले स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित किए जाएं।
मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर समेत कुल 29 महानगरपालिकाओं में 15 जनवरी को चुनाव होंगे।
संगठन के पदाधिकारियों ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मतदाताओं को दल या धर्म की परवाह किये बिना मराठी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां एक से अधिक मराठी उम्मीदवार मैदान में हों, वहां मतदाताओं से आग्रह किया गया कि वे मराठी भाषा, मराठी माध्यम के स्कूलों, मराठी लोगों और महाराष्ट्र की संस्कृति के प्रति समर्पित उम्मीदवारों का समर्थन करें।
‘मराठीनामा’ में कहा गया है कि ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो सार्वजनिक रूप से धाराप्रवाह मराठी बोल सकते हैं, स्थानीय भाषा में चुनाव प्रचार कर सकते हैं और राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करते हैं, जबकि जो महाराष्ट्र की पहचान को कमजोर करने वालों को बढ़ावा देते हैं, उन्हें अस्वीकार किया जाना चाहिए।
इसमें यह मांग की गई है कि महापौर और सभी नगर समितियों के अध्यक्ष मराठी भाषी हों।
संगठन ने मराठी में साइनबोर्ड न लगाने वाली दुकानों पर भारी जुर्माना लगाने और नियमों का सख्ती से पालन न कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही, खान-पान की आदतों के आधार पर आवास देने से इनकार करने वाली आवासीय सोसाइटियों के खिलाफ पानी, बिजली और अधिभोग प्रमाण पत्र रद्द करने सहित दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की गई।