मनरेगा परिवर्तनकारी कानून था, जी राम जी अधिनियम खामियों से भरा है : कांग्रेस

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 02-02-2026
MNREGA was a transformative law, the Ji Ramji Act is full of flaws: Congress
MNREGA was a transformative law, the Ji Ramji Act is full of flaws: Congress

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक परिवर्तनकारी कानून था, जबकि मोदी सरकार द्वारा लाया गया 'विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम' खामियों से भरा हुआ है।
 
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा कर दोनों कानूनों की तुलना की। यह तस्वीर आंध्र प्रदेश की एक महिला लाभार्थी को सबसे पहले मनरेगा जॉब कॉर्ड प्रदान किए जाने से संबंधित है।
 
रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "आज से ठीक 20 साल पहले, मनरेगा को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के बदनापल्ली गांव में शुरू किया गया था। इन 20 वर्षों के दौरान, मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों (विशेष रूप से महिलाओं) को 180 करोड़ कार्य-दिवस प्रदान किए, अनुमानित 10 करोड़ सामुदायिक परिसंपत्तियां तैयार कीं, पलायन को काफ़ी हद तक कम किया, ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया और ग्रामीण गरीबों की ज़्यादा मज़दूरी के लिए मोलभाव करने की शक्ति को निर्णायक रूप से बढ़ाया है।"
 
उनका कहना है कि मनरेगा ने इसकी मज़दूरी को सीधे बैंक और डाकघर खातों में जमा करने के लिए प्रत्यक्ष अंतरण पहल की भी शुरुआत की।
 
पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, "मनरेगा एक मांग-आधारित कानूनी गारंटी अधिनियम था, सिर्फ़ एक प्रशासनिक वादा नहीं था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 से मिला हुआ एक अधिकार था। नागरिकों द्वारा मांग किए जाने पर काम आवंटित किया जाता था और ग्रामीण भारत में कहीं भी उपलब्ध कराया जाता था। परियोजनाओं का निर्णय स्थानीय ग्राम पंचायत करती थी, और कुल लागत का केवल 10 प्रतिशत वहन करने के कारण राज्य सरकार को बिना बड़े वित्तीय बोझ के काम उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहन मिलता था। "
 
उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार का नया क़ानून केवल नई दिल्ली में केंद्रीकरण की गारंटी देता है।
 
रमेश ने कहा, "अब काम कुछ चुनिंदा ज़िलों में मोदी सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। काम नागरिकों की मांग के बजाय सरकार द्वारा आवंटित बजट के आधार पर दिया जाएगा। यह योजना हर साल दो महीनों के लिए यानी कृषि गतिविधियों के दौरान पूरी तरह बंद रहेगी जो श्रमिकों की मोलभाव करने की शक्ति के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे कृषि कार्य के वास्ते बेहतर वेतन के लिए मोलभाव नहीं कर पाएंगे। पंचायत को हाशिए पर डाल दिया गया है और परियोजनाएं मोदी सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार तय करेगी। "
 
कांग्रेस नेता ने कहा, "अब राज्यों को लागत का 40 प्रतिशत वहन करना होगा, उनकी वित्तीय तंगी को देखते हुए वे ऐसा नहीं कर पाएंगे और काम देना ही बंद कर देंगे।"