आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मिशन आर्टेमिस-दो के दल ने अब तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक मानव की यात्रा का यह रिकॉर्ड पहले अपोलो-13 के नाम था। मिशन आर्टेमिस-दो के दल ने चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से का चक्कर (फ्लाईबाय) भी पूरा किया और चंद्रमा की सतह की शानदार तस्वीरें भेजीं।
मैं एक प्रोफेसर, अन्वेषक और ग्रह भूवैज्ञानिक हूं, जो उल्कापिंड प्रभाव संरचनाओं के अध्ययन में विशेषज्ञता रखता हूं। मैं प्रथम आर्टेमिस लूनर सरफेस साइंस टीम का सदस्य भी हूं और आर्टेमिस अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भूविज्ञान प्रशिक्षण विकसित करने में नासा का सहयोग कर रहा हूं।’’
यह फ्लाईबाय विशेष रूप से रोमांचक था क्योंकि इसने चंद्रमा की सतह का एक नया और अद्भुत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसने ह्यूस्टन, टैक्सास स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में मिशन कंट्रोल के नए विज्ञान दल और ‘साइंस इवैल्यूएशन रूम (एसईआर)’ के संचालन का पहला परीक्षण भी किया।
मिशन आर्टेमिस-दो के दल को चंद्रमा की सतह पर भू-आकृतिक संरचनाओं का अवलोकन करते और उनकी तस्वीरें लेते देखना बेहद शानदार था। वे मेरे साथ उत्तरी लैब्राडोर में मुशुआउ इनु फर्स्ट नेशन के क्षेत्र में स्थित कामेस्टास्टिन झील प्रभाव संरचना में प्राप्त अपने प्रशिक्षण को व्यवहार में लागू कर रहे थे।
चंद्रमा का नया दृश्य
अपोलो मिशनों में यान चंद्रमा की सतह से लगभग 110 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करते थे। इसके विपरीत आर्टेमिस-दो कहीं अधिक ऊंचाई यानी चंद्रमा की सतह से लगभग 6,545 किलोमीटर पर था।
इस अधिक दूरी के कारण दल चंद्रमा को एक पूर्ण डिस्क के रूप में देख पाया जिसमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के निकट के क्षेत्र भी शामिल थे।
दल आर्टेमिस-दो विज्ञान कार्यक्रम के तहत चंद्रमा की सतह की विभिन्न भू-आकृतिक संरचनाओं की लक्षित तस्वीरें लेने में भी सक्षम रहा। इन अध्ययनों का एक प्रमुख उद्देश्य भविष्य के मिशनों, विशेष रूप से 2028 तक प्रस्तावित आर्टेमिस-चार के साथ चंद्रमा की सतह पर वापसी के लिए जानकारी उपलब्ध कराना है।
नयी विज्ञान टीम
मिशन के दौरान नासा के लाइवस्ट्रीम कार्यक्रम की एक प्रमुख झलक दो अच्छे मित्रों—कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन और विज्ञान अधिकारी केल्सी यंग—के बीच सीधी बातचीत रही।
विज्ञान अधिकारी वे वरिष्ठ फ्लाइट कंट्रोलर होते हैं जो आर्टेमिस मिशनों के दौरान चंद्र विज्ञान और भूविज्ञान से जुड़े उद्देश्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
वे मिशन कंट्रोल की व्यापक टीम और आर्टेमिस-दो विज्ञान टीम के बीच मुख्य कड़ी के रूप में काम करते हैं। यह विज्ञान टीम एक अलग कक्ष में होती है, जिसे ‘साइंस इवैल्यूएशन रूम (एसईआर)’ कहा जाता है।