आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ‘कमजोर और अपमानित’ किया जा रहा है और एक ‘ऐसे मंत्री’ द्वारा उनके निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय विकास परियोजनाओं से जुड़ी सिफारिशों को दरकिनार किया जा रहा है जो ‘संयोग’ से मंत्री बन गए।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए हंदवाड़ा के विधायक लोन ने विधानसभा अध्यक्ष से पूछा कि यदि सदन के सदस्यों के जनादेश का इसी तरह "अनादर" होता रहा तो सदन सदस्यों को क्या राहत देगा।
विधानसभा में शून्य काल के दौरान लोन ने कहा, "क्या एक विधायक के रूप में हमारे पास अधिकार हैं? क्या हमें अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों पर फैसला लेने का अधिकार है? मैंने सड़कों की एक सूची दी थी, लेकिन उन्होंने उसे खारिज कर दिया और अपनी मनमर्जी कर रहे हैं।"
किसी का नाम लिए बिना लोन ने कहा कि वह अपने क्षेत्र से जुड़े मामलों का फैसला किसी " ऐसे मंत्री" को नहीं करने देंगे जो ‘संयोग’ से मंत्री बन गए। उन्होंने कहा कि ऐसे मंत्रियों को विधायकों के अधिकारों को "कुचलने" की इजाजत नहीं दी जाएगी।
विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि जनप्रतिनिधियों की गरिमा और अधिकार सीधे इस विधानसभा से मिलते हैं, लेकिन अगर उनके इस संवैधानिक पद की गरिमा या अधिकारों से समझौता किया गया तो विधायक सड़कों पर उतरने सहित अन्य विकल्पों को अपनाने में संकोच नहीं करेंगे।