Microbes in Antarctica stay active even in winter by drawing energy from the air: Study
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अंटार्कटिका की लंबी और अंधेरी सर्दियों में तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है और कई क्षेत्रों में अप्रैल से अगस्त तक सूरज नहीं निकलता, लेकिन तब भी वहां जीवन पूरी तरह नहीं रुकता।
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अंटार्कटिका के सूक्ष्मजीव हवा में मौजूद गैसों से ऊर्जा लेकर बेहद ठंडे मौसम में भी सक्रिय बने रहते हैं।
‘द आईएसएमई’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि अंटार्कटिका के कुछ सूक्ष्मजीव शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक के तापमान में भी वातावरण से हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों का उपयोग कर ऊर्जा बना सकते हैं। यह खोज यह समझने में मदद करती है कि अत्यधिक ठंडे और कठोर वातावरण में जीवन कैसे जीवित रहता है और भविष्य में जलवायु परिवर्तन इस प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित कर सकता है।
सामान्यतः पृथ्वी के अधिकतर स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों में खाद्य श्रृंखला का आधार प्रकाश संश्लेषण होता है। पौधे सूर्य के प्रकाश और वातावरण से कार्बन लेकर ऊर्जा और जैविक पदार्थ का निर्माण करते हैं। लेकिन अंटार्कटिका की शुष्क और ठंडी मिट्टी में सूर्य का प्रकाश लंबे समय तक उपलब्ध नहीं होता और वहां प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीव बहुत कम पाए जाते हैं। ऐसे में सूक्ष्मजीवों के लिए ऊर्जा प्राप्त करने का तरीका अलग होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार “एरोट्रॉफी” नामक प्रक्रिया अंटार्कटिका के सूक्ष्मजीवों को जीवित रहने में मदद करती है। इस प्रक्रिया में सूक्ष्मजीव विशेष एंजाइमों की मदद से वातावरण में बेहद कम मात्रा में मौजूद हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड को पहचानते हैं और उनसे ऊर्जा बनाते हैं। पोषक तत्वों की कमी वाले अंटार्कटिका के रेगिस्तानी इलाकों में यह क्षमता उनके लिए एक बड़ा लाभ है।
शोधकर्ताओं ने 2022 से 2024 के बीच पूर्वी अंटार्कटिका के अलग-अलग क्षेत्रों से सतह की मिट्टी के नमूने एकत्र किए और प्रयोगशाला में उनका विश्लेषण किया। उन्होंने यह मापा कि सूक्ष्मजीव वातावरणीय गैसों का कितनी तेजी से उपयोग करते हैं। इसके अलावा मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों का डीएनए निकालकर उसका अनुक्रमण किया गया, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वहां कौन-कौन से सूक्ष्मजीव मौजूद हैं और वे ऊर्जा के लिए किन स्रोतों का उपयोग करते हैं।
प्रयोगों में पाया गया कि यह प्रक्रिया गर्मियों के औसत तापमान (लगभग 4 डिग्री सेल्सियस) और सर्दियों के तापमान (शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे) दोनों स्थितियों में सक्रिय रहती है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड पूरे वर्ष इन सूक्ष्मजीवों के लिए ऊर्जा का स्रोत बने रहते हैं।