लाड़ली बहना योजना के अमल में दखल से मप्र उच्च न्यायालय का इनकार, जनहित याचिका खारिज

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 11-02-2026
Madhya Pradesh High Court refuses to interfere in the implementation of Ladli Behna Yojana, dismisses PIL
Madhya Pradesh High Court refuses to interfere in the implementation of Ladli Behna Yojana, dismisses PIL

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए संचालित लाड़ली बहना योजना के अमल पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी शासकीय योजना के कार्यान्वयन से जुड़े नीतिगत निर्णय सरकार पर निर्भर करते हैं।
 
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका दोनों पक्षों के तर्कों पर गौर के बाद मंगलवार को खारिज कर दी।
 
सकलेचा ने याचिका में गुहार लगाई थी कि राज्य सरकार के वादे के मुताबिक लाड़ली बहना योजना की हर हितग्राही को प्रति माह 3,000 रुपये दिए जाएं, नयी हितग्राहियों के पंजीयन शुरू किए जाएं और हितग्राहियों की पात्रता की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष के बजाय 18 वर्ष करते हुए उन्हें जीवन पर्यंत योजना का लाभ दिया जाए।
 
याचिकाकर्ता के वकील ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया कि योजना के अब भी जारी रहने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा 20 अगस्त 2023 से नयी हितग्राहियों के पंजीकरण रोके जाने का कदम 'अवैध, मनमाना और भेदभावपूर्ण' है।
 
उधर, राज्य सरकार के वकील ने कहा कि योजना का क्रियान्वयन शासन के नीतिगत निर्णय के मुताबिक किया जा रहा है और योजना के लाभ का दावा करने वाली किसी भी महिला ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर नहीं की है, इसलिए सरकारी नीति की जांच जनहित याचिका के आधार पर नहीं की जा सकती।