तिरुवनंतपुरम
केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने रविवार को केंद्र सरकार पर राज्य के साथ “आर्थिक भेदभाव” करने का आरोप लगाया और कहा कि अनियंत्रित अनुदान कटौती और उधारी सीमा में कमी के माध्यम से राज्य को आर्थिक रूप से दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे संविधान द्वारा दिए गए केरल के अधिकारों को छीनने की कोशिश करार दिया और इसे लोकतांत्रिक देश में अस्वीकार्य बताया।
मुख्यमंत्री ने यह बयान तब दिया जब वे राज्य में केंद्र सरकार के खिलाफ एक दिनभर चलने वाले सत्याग्रह प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य को उसके वित्तीय अधिकारों के लिए “असाधारण संघर्ष” करना पड़ रहा है और सभी से आग्रह किया कि केरल को उसका न्यायसंगत हिस्सा दिलाने के लिए एकजुट रहें।
विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हाल ही में इस वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन महीनों के लिए राज्य को मिलने वाले अनुदानों का आधे से अधिक हिस्सा बिना किसी ठोस कारण के रोक दिया। उन्हें जनवरी–मार्च अवधि में 12,000 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन केवल 5,900 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके चलते राज्य की व्यय प्रतिबद्धताओं को पूरा करना मुश्किल हो गया।
उन्होंने कहा कि केंद्र की वित्तीय नियंत्रण नीति के चलते स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में राज्य की उपलब्धियों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीकृत शक्ति का दुरुपयोग कर, केंद्र सरकार राजनीतिक रूप से मित्रवत राज्यों को लाभ देती है और विपक्षी शासित राज्यों पर आर्थिक दमन करती है।
मुख्यमंत्री ने 2018 के केरल बाढ़ और वायनाड भूस्खलन के समय विदेशी सहायता और राहत रोकने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राज्य की वित्तीय समस्याएँ व्ययहीनता या गलत प्रबंधन के कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक कारणों से प्रस्तुत की जा रही हैं।
विजयन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने राज्यों के कर हिस्से में कटौती के लिए वित्त आयोग पर दबाव डाला। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग संवैधानिक निकाय है और इसके निर्णय स्वतंत्र होने चाहिए।
सत्याग्रह प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि वे केंद्र सरकार के भेदभाव के खिलाफ संघर्ष जारी रखें, जिसमें कानूनी उपाय भी शामिल हैं, ताकि संघीयता, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा हो और केरल को उसका न्यायसंगत वित्तीय हिस्सा मिल सके।
इस दिनभर चलने वाले सत्याग्रह में कैबिनेट मंत्री, विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विपक्षी कांग्रेस-नेतृत्व वाली यूडीएफ की भी आलोचना की और कहा कि उसने केंद्र के भेदभाव के खिलाफ एकजुट रुख नहीं अपनाया।