Karnataka: KPCC chief BK Hariprasad welcomes SC remarks on Vande Mataram, says patriotism cannot be forced
बेंगलुरु (कर्नाटक)
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने बुधवार को 'वंदे मातरम' गाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति थोपी नहीं जा सकती और नागरिकों को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ के अनुसार काम करने का अधिकार है। X पर एक पोस्ट में, हरिप्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक मान्यताओं या अंतरात्मा की आवाज़ के कारण 'वंदे मातरम' गाने से इनकार करने वाले व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर संवैधानिक स्थिति स्पष्ट कर दी है कि 'वंदे मातरम' न गाने पर किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर कोई धार्मिक मान्यता या अंतरात्मा की आवाज़ के कारण इसे गाने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।"
हरिप्रसाद ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी का रुख स्पष्ट है और उन्होंने AICC कार्यकारी समिति और कर्नाटक में लिए गए उस फैसले का ज़िक्र किया जिसके तहत सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद गाए जाते हैं।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने AICC कार्यकारी समिति और कर्नाटक में पहले ही यह तय कर लिया है कि सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद गाए जाएंगे। इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट है।" उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति का मतलब किसी को गाना गाने के लिए मजबूर करना नहीं है, बल्कि यह संविधान, विविधता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करने में निहित है।
हरिप्रसाद ने कहा, "देशभक्ति किसी को जबरन गाना गाने के लिए मजबूर करने में नहीं है। देशभक्ति का अर्थ है संविधान का सम्मान करना, देश की विविधता का आदर करना और हर नागरिक की अंतरात्मा की स्वतंत्रता की रक्षा करना।" कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाने की अनिवार्यता वाला सिस्टम लागू किया है, जबकि इस गीत को लेकर ऐतिहासिक चर्चाएं भारत की अनेकता (pluralism) को ध्यान में रखकर की गई थीं।
उन्होंने कहा, "आज़ादी की लड़ाई के दौरान भी राष्ट्रीय नेताओं ने 'वंदे मातरम' पर गंभीर चर्चा की थी और एक ऐसा रास्ता तय किया था जो देश की अनेकता का सम्मान करता हो। उस ऐतिहासिक सहमति को दरकिनार करते हुए, केंद्र सरकार ने लोगों के लिए सभी छह पद आधिकारिक रूप से गाने की अनिवार्यता वाला नया सिस्टम लागू कर दिया है।" हरिप्रसाद ने आगे कहा कि "वंदे मातरम" गाने का कोई विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस गाने के सम्मान के नाम पर संविधान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "देश में ऐसी कोई स्थिति नहीं है जहाँ किसी को बीजेपी से देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट लेने की ज़रूरत हो। जैसे हर किसी को देश से प्यार करने का अधिकार है, वैसे ही हर नागरिक को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ के अनुसार काम करने का भी अधिकार है।" कर्नाटक विधानसभा की घटना को लेकर बीजेपी सदस्यों पर निशाना साधते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि इस घटना से इस मुद्दे पर पार्टी के रुख में अस्पष्टता उजागर हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सदस्यों ने सरकारी कार्यक्रमों में "वंदे मातरम" के केवल शुरुआती दो पद गाने के फ़ैसले का विरोध किया और विधानसभा में गाने का पूरा संस्करण गाया।
हरिप्रसाद ने कहा, "किसी गाने को राजनीतिक हथियार बनाना, जबकि उसी गाने को सही ढंग से न गा पाना, एक राजनीतिक विरोधाभास है।" उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से उन लोगों को राहत मिलेगी जो "वंदे मातरम" गाने के लिए मजबूर नहीं होना चाहते।