Green hydrogen's 2030 outlook remains uncertain, long-term potential strong: NTPC official
नई दिल्ली
NTPC में हाइड्रोजन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर DMR पांडा के अनुसार, 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन का भविष्य अभी अनिश्चित है, लेकिन इस इंडस्ट्री में लंबे समय में ग्रोथ की काफी संभावना है क्योंकि देश एनर्जी सिक्योरिटी को बेहतर बनाने और फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। S&P ग्लोबल के 'होरिजन्स क्लीन एनर्जी एक्सपेंशन इंडिया कॉन्फ्रेंस' के दौरान ANI से बात करते हुए पांडा ने कहा कि हालांकि 2030 तक इस इंडस्ट्री की संभावनाएं अभी साफ नहीं हो सकती हैं, लेकिन लंबे समय का नजरिया अच्छा है।
उन्होंने कहा, "2030 का समय अभी बहुत उज्ज्वल या स्पष्ट नहीं हो सकता है, लेकिन हर कोई इस बात को लेकर निश्चित है कि 10 साल बाद क्या होगा। क्यों? क्योंकि जिस तरह से एनर्जी सिक्योरिटी पर काम हो रहा है और जिस तरह से लोग डीकार्बोनाइजेशन पर ध्यान दे रहे हैं, उसे देखते हुए इसमें बहुत बड़ी संभावना है और इसका कोई मुकाबला नहीं है।" पांडा ने भारत के प्राकृतिक संसाधनों और फॉसिल फ्यूल के विकल्प तलाश रहे देशों से बढ़ती मांग का हवाला देते हुए, भारत के एक बड़े ग्रीन हाइड्रोजन निर्यातक के रूप में उभरने की क्षमता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा, "मैं कहूंगा कि यह क्षमता बहुत बड़ी है क्योंकि भारत जैसे प्राकृतिक संसाधन किसी अन्य देश के पास नहीं हैं। हमारे पास मीठा पानी है, हमारे पास पर्याप्त समुद्र तट है, बहुत सारा समुद्री पानी है, और हमारे पास पर्याप्त धूप है।" उन्होंने कहा कि चुनौती इन संसाधनों को एक साथ लाकर हाइड्रोजन का उत्पादन करना और फॉसिल फ्यूल की जगह इसका इस्तेमाल करना है। जापान और यूरोपीय संघ को संभावित निर्यात बाजारों के रूप में चिह्नित करते हुए, पांडा ने कहा कि जिन देशों के पास प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित पहुंच है, वे अपनी ग्रीन हाइड्रोजन जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत की ओर देख सकते हैं।
उन्होंने कहा, "खासकर वे देश जिनके पास पर्याप्त मीठा पानी या धूप नहीं है, उन्हें इसकी जरूरत है, जैसे जापान या यूरोपीय संघ। इसीलिए निर्यात की काफी संभावना है।"
भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने के सरकार के प्रयासों पर पांडा ने कहा कि 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' केंद्रीय स्तर पर पॉलिसी सपोर्ट देता है, जबकि राज्य सरकारें भी हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के विकास में सहयोग कर रही हैं। आंध्र प्रदेश में NTPC के हाइड्रोजन हब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, जमीन की उपलब्धता और रेगुलेटरी मंजूरियों के जरिए प्रोजेक्ट में सहयोग कर रही है।
उन्होंने कहा, "अब हमारा हाइड्रोजन हब आंध्र में बन रहा है। तो राज्य सरकार हर संभव तरीके से हमारी मदद कर रही है, चाहे वह प्राइवेट जेटी बनाना हो।" उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन के लिए ज़रूरी मंज़ूरी पाने और ज़मीन उपलब्ध कराने में राज्य सरकार के सहयोग पर भी ज़ोर दिया। पांडा ने कहा कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें भारत के ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग के विकास में मदद करने के लिए काम कर रही हैं।