आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
झारखंड सरकार हाथियों के हमलों की बढ़ती घटनाओं और गत एक सप्ताह में ऐसे मामलों में 25 लोगों की मौत के बीच मानव-पशु संघर्ष को कम करने और वनों को पुनर्स्थापित करने के लिए 10 वर्षीय दूरदर्शी योजना तैयार कर रही है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 30 सूत्री एजेंडा से संबंधित इस व्यापक योजना का उद्देश्य इस तरह की समस्या का समाधान करना, वन्यजीव आवासों में सुधार करना, क्षरित हो चुके वनों को पुनर्स्थापित करना और स्थानीय समुदायों के लिए वन-आधारित आजीविका को बढ़ावा देना है।
अधिकारियों ने बताया कि इस दूरदर्शी योजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर वनरोपण के माध्यम से खनन संबंधी प्रदूषण को कम करना और बेहतर प्रबंधन तथा संरक्षण के लिए वन सीमाओं का डिजिटलीकरण करना भी है।
झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने कहा कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो दृष्टिकोण पत्र को 31 मार्च तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इसे अगले वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा।
पीसीसीएफ ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘राज्य में मानव-पशु विशेषकर हाथियों के साथ बढ़ते संघर्षों को लेकर हम चिंतित हैं। इन मुद्दों के समाधान के लिए, हम एक 10-वर्षीय दूरदर्शी योजना तैयार कर रहे हैं, जिसे 31 मार्च तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा और आगामी वित्तीय वर्ष में लागू किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि दृष्टिपत्र का उद्देश्य पारिस्थितिकी संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना है, जिससे मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच अधिक सामंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व की उम्मीद जगती है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘दस वर्षीय दृष्टिपत्र में 30 मुद्दे शामिल हैं, जैसे कि वनों को पुनर्स्थापित करना, स्थानीय समुदायों के लिए वन-आधारित आजीविका का सृजन, वन सीमाओं का संरक्षण और डिजिटलीकरण, राज्य में बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे जानवरों के आवासों में सुधार, खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास ताकि प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जा सके और स्थानीय जलवायु में सुधार के लिए एक सूक्ष्म योजना तैयार करना।’’
यह दृष्टिकोण पत्र ऐसे समय में तैयार किया जा रहा है जब झारखंड में मानव-पशु संघर्षों के कारण जानमाल की हानि की खबरें लगातार आ रही हैं।