रक्षाबंधन पर झारखंड के ग्रामीण एक लाख पेड़ों को राखी बांधेंगे

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 27-08-2026
Jharkhand villagers to tie Rakhi to 100,000 trees on Rakshabandhan
Jharkhand villagers to tie Rakhi to 100,000 trees on Rakshabandhan

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
झारखंड के 700 गांवों में हजारों ग्रामीण लोगों और प्रकृति के बीच भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर करीब एक लाख पेड़ों को राखी बांधेंगे। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि यह पहल ‘पेड़ बचाओ’ अभियान का हिस्सा है, जो एक महीने तक चलेगा। इस अभियान के तहत 24 जिलों के चिन्हित गांवों में तीन लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य रखा गया है।
 
कुमार शुक्रवार को गुमला जिले के जोराड़ गांव में एक पेड़ को राखी बांधकर इस अभियान की शुरुआत करेंगे।
 
कुमार ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, “रक्षाबंधन भाई-बहन का त्योहार है। इस दिन भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। इसी तरह, पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा सर्वोच्च कर्तव्य है, क्योंकि हमारा जीवन इसी पर निर्भर है।”
 
उन्होंने कहा कि यह अभियान लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने पर केंद्रित है। इसके तहत लोग पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।
 
पीसीसीएफ ने कहा, “हमने शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन 700 गांवों में करीब एक लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य रखा है। यह अभियान एक महीने तक जारी रहेगा और इस दौरान 24 जिलों में करीब तीन लाख पेड़ों को राखी बांधी जाएगी।”
 
कुमार की इस पहल की शुरुआत वर्ष 2004 में धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के लुकैया गांव से हुई थी जो कभी माओवाद प्रभावित रहा था।
 
उन्होंने बताया कि तब से अब तक राज्यभर में 12,000 से अधिक गांवों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है।
 
उन्होंने कहा, “इस पहल के माध्यम से लुकैया गांव में 20,000 से अधिक महुआ के पेड़ों को संरक्षित किया गया। अब ये पेड़ ग्रामीणों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह अकेला उदाहरण नहीं है। इस अभियान ने कई गांवों में लघु वनोपज के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद की, जिससे ग्रामीणों की आजीविका में अतिरिक्त आय जुड़ी।”
 
कुमार ने कहा कि इस पहल ने झारखंड के वन क्षेत्र को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
 
उन्होंने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के अनुसार, पिछले कई वर्षों से झारखंड के वन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हो रही है।
 
वन विभाग के प्रयासों का असर सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2001 से पिछले दो दशकों के दौरान राज्य के वन क्षेत्र में 1,128 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।