जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने पास किए दो प्रस्ताव

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 30-04-2026
Jamaat-e-Islami Hind Passes Two Resolutions
Jamaat-e-Islami Hind Passes Two Resolutions

 

नई दिल्ली

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की केंद्रीय सलाहकार परिषद (मरकज़ी मजलिस-ए-शूरा) ने दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में दो अहम प्रस्ताव पारित किए। इन प्रस्तावों में एक ओर वैश्विक हालात, खासकर मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर चिंता जताई गई, वहीं दूसरी ओर भारत की मौजूदा आंतरिक स्थिति और लोकतांत्रिक चुनौतियों पर गंभीर सवाल उठाए गए।

पहले प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर बात करते हुए परिषद ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान और लेबनान पर किए गए हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। परिषद के अनुसार, नागरिक ठिकानों—जैसे स्कूल, अस्पताल और आम आबादी—को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ है और यह क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ाने वाला कदम है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि इस तरह की कार्रवाइयां मध्य पूर्व को लंबे समय तक भय और संघर्ष की स्थिति में बनाए रख सकती हैं। परिषद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह निष्पक्ष भूमिका निभाए और शांति बहाली के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा गया कि स्थायी समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है, युद्ध इसका विकल्प नहीं हो सकता।

दूसरे प्रस्ताव में देश की आंतरिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। परिषद ने कहा कि भारत में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। विशेष रूप से चुनावों के दौरान नफरती नैरेटिव का इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि सत्ता हासिल करने के लिए समाज को बांटना देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को कमजोर करता है और इसके दीर्घकालिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि संवैधानिक और सरकारी संस्थाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग बढ़ता जा रहा है, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। मतदाता सूची में ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए कहा गया कि इससे लाखों नागरिकों, खासकर मुसलमानों और अन्य हाशिए पर मौजूद वर्गों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

अपने निष्कर्ष में परिषद ने कहा कि देश में अभी भी कई न्यायप्रिय समूह, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक मौजूद हैं, जो संविधान की रक्षा और जनता के अधिकारों के लिए प्रयास कर रहे हैं। परिषद ने सरकार से अपील की कि वह अपना ध्यान वास्तविक मुद्दों—जैसे महंगाई, बेरोजगारी और ईंधन संकट—पर केंद्रित करे और इनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए।

साथ ही, मुस्लिम समुदाय से भी अपील की गई कि वे भावनात्मक राजनीति से दूर रहकर शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सहयोग पर ध्यान दें। परिषद ने कहा कि समाज में संवाद, भाईचारा और समानता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, ताकि देश में शांति और न्याय की मजबूत नींव रखी जा सके।