इसरो ने गगनयान मिशन के लिए दूसरा एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 10-04-2026
ISRO successfully conducts second integrated air drop test for Gaganyaan mission
ISRO successfully conducts second integrated air drop test for Gaganyaan mission

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष स्टेशन पर आगामी गगनयान मिशन के लिए दूसरा एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण (आईएडीटी-02) सफलतापूर्वक आयोजित किया।

यह प्रणाली कैप्सूल कर्मी दल मॉड्यूल के कैप्सूल के पुनः प्रवेश और लैंडिंग के दौरान उसके सुरक्षित रूप से उतरने के लिए आवश्यक है। मानव उड़ान के दौरान अंतरिक्ष यात्री इसी कैप्सूल में बैंठेंगे।
 
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सफल परीक्षण के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी।
 
सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘भारत के पहले मानव अंतरिक्ष यान गगनयान के लिए दूसरे एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण (आईएडीटी-02) के सफलता पूर्वक पूरा होने पर इसरो को बधाई। गगनयान के अगले साल अंतरिक्ष में प्रक्षेपित होने की संभावना है। दूसरा एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण (आईएडीटी-02) सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन श्रीहरिकोटा में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।’’
 
पहले आईएडीटी परीक्षण के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद आईएडीटी-02 शुरू किया गया। पहला परीक्षण 24 अगस्त, 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में हुआ था।
 
एयर ड्रॉप परीक्षण में अंतरिक्ष यान की पृथ्वी पर वापसी के अंतिम चरण की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाता है। विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न प्रणालियों का परीक्षण करने के लिए एक विमान या हेलीकॉप्टर अंतरिक्ष यान को एक निश्चित ऊंचाई से गिराता है।
 
इनमें मिशन के बीच में रद्द होने की स्थिति में पैराशूट प्रणाली की तैनाती, एक पैराशूट के नहीं खुलने की स्थिति में प्रणाली का प्रदर्शन और पानी में उतरने के दौरान अंतरिक्ष यान का अभिविन्यास और सुरक्षा आदि शामिल हैं।
 
पहले आईएडीटी में एक चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा तीन किलोमीटर की ऊंचाई से 4.8 टन के डमी कर्मी दल मॉड्यूल को गिराया गया था।
 
मॉड्यूल के अलग होने के बाद 10 पैराशूट से युक्त एक पैराशूट प्रणाली तैनात की गई जिससे कैप्सूल की गति को कम करके उसे सुरक्षित रूप से पानी में उतरने की गति तक पहुंचाने में मदद मिली। अधिक महत्वपूर्ण और स्थायी है।’’