India's labour market shows signs of strength as employment reaches 57.4 crore: Finmin Review
नई दिल्ली
फाइनेंस मिनिस्ट्री के फरवरी 2026 के मंथली इकोनॉमिक रिव्यू के मुताबिक, भारत का लेबर मार्केट बढ़ते एम्प्लॉयमेंट लेवल और महिलाओं समेत वर्कफोर्स में बेहतर भागीदारी के साथ मजबूत होने के संकेत दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉलिसी रिफॉर्म, सोशल प्रोटेक्शन उपायों और स्किल डेवलपमेंट की पहल से लेबर मार्केट इंडिकेटर लगातार बेहतर हो रहे हैं। रिव्यू में कहा गया है, "हाल के लेबर मार्केट इंडिकेटर रेगुलेटरी रिफॉर्म, बढ़ी हुई सोशल प्रोटेक्शन और टारगेटेड स्किल डेवलपमेंट की पहल के कॉम्बिनेशन से बेहतर एम्प्लॉयमेंट लैंडस्केप को दिखाते हैं।"
अक्टूबर-दिसंबर 2025 (Q3 FY26) के लिए लेटेस्ट तिमाही पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) अनुमानों के मुताबिक, एम्प्लॉयमेंट बढ़कर एवरेज 57.4 करोड़ लोगों तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही में 56.2 करोड़ था। 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र की कुल एम्प्लॉयड आबादी में से, 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं थीं, जो वर्कफोर्स में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। रिव्यू में कहा गया है, "लेबर मार्केट इंडिकेटर बताते हैं कि रोज़गार की स्थिति धीरे-धीरे मज़बूत हो रही है... Q3 FY26 में रोज़गार बढ़कर औसतन 57.4 करोड़ लोगों तक पहुँच गया, जिसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी शामिल है।" इसमें कहा गया है कि बजट स्ट्रैटेजी में रोज़गार बढ़ाने, स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और हेल्थकेयर में निवेश को शामिल किया गया है ताकि रोज़गार पाने की क्षमता और वर्कफ़ोर्स की भागीदारी को बेहतर बनाया जा सके।
तिमाही के दौरान रोज़गार की स्थिति स्थिर रही, जिसमें लेबर फ़ोर्स की भागीदारी बढ़ी और बेरोज़गारी में धीरे-धीरे कमी आई, जो सभी सेक्टरों में मज़बूत वर्कर एब्ज़ॉर्प्शन का संकेत देती है। रिपोर्ट में कहा गया है, "तिमाही के दौरान रोज़गार की स्थिति स्थिर रही, जिसमें लेबर फ़ोर्स की भागीदारी बढ़ी और बेरोज़गारी में धीरे-धीरे कमी आई, जो सभी सेक्टरों में वर्कर एब्ज़ॉर्प्शन जारी रहने का संकेत देती है।"
हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी हायरिंग ट्रेंड में सुधार का संकेत देते हैं, खासकर उभरते सर्विस सेगमेंट में। रिव्यू में कहा गया है कि व्हाइट-कॉलर हायरिंग 2026 में स्थिर आधार पर शुरू हुई, जिसे BPO/ITES, हॉस्पिटैलिटी, इंश्योरेंस और हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों में ग्रोथ का सपोर्ट मिला। बजट में रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग, खेती से जुड़ी एक्टिविटी और टूरिज्म, हेल्थकेयर और केयर इकॉनमी जैसे सर्विस सेक्टर शामिल हैं, साथ ही स्किल पाथवे को मज़बूत करने और ट्रेनिंग को इंडस्ट्री की डिमांड के साथ जोड़ने पर भी ध्यान दिया गया है। फाइनेंस मिनिस्ट्री के रिव्यू में कहा गया है कि इन उपायों का मकसद लेबर मार्केट में भागीदारी को बढ़ाना और यह पक्का करना है कि इकॉनमिक ग्रोथ रोज़गार पर आधारित और सबको साथ लेकर चलने वाली बनी रहे।