ईरान के खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दिया समर्थन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-03-2026
India extends support at the United Nations to Iran's missile and drone attacks on Gulf countries
India extends support at the United Nations to Iran's missile and drone attacks on Gulf countries

 

संयुक्त राष्ट्र

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों और जॉर्डन पर ईरान द्वारा किए गए “गंभीर और निंदनीय” हमलों की कड़ी आलोचना की गई है। प्रस्ताव में तेहरान से सभी हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी की भी निंदा की गई है।

15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जिसकी वर्तमान अध्यक्षता अमेरिका कर रहा है, ने बुधवार को इस प्रस्ताव को पारित किया। प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि किसी ने विरोध नहीं किया। हालांकि स्थायी सदस्य चीन और रूस ने मतदान में भाग नहीं लिया।

यह प्रस्ताव बहरीन के नेतृत्व में पेश किया गया था और भारत सहित 135 देशों ने इसका सह-प्रायोजन किया। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका सहित कई अन्य देश शामिल हैं।

प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति मजबूत समर्थन दोहराया गया है। इसमें कहा गया है कि इन देशों के क्षेत्रों पर ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

सुरक्षा परिषद ने ईरान से मांग की कि वह खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ सभी प्रकार के हमलों को तुरंत बंद करे और पड़ोसी देशों के खिलाफ किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई या धमकी से भी दूर रहे। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रस्ताव में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या वहां नौवहन में बाधा डालने की किसी भी कोशिश की कड़ी निंदा की गई है। इसके अलावा बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी कदम का भी विरोध किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रतिनिधि राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि इस प्रस्ताव को अपनाना ईरान की कार्रवाइयों के खिलाफ एक स्पष्ट और सख्त संदेश है। उन्होंने कहा कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बेहद निंदनीय है और पूरी दुनिया इसकी आलोचना कर रही है।

वहीं संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने इस प्रस्ताव को “अनुचित और गैरकानूनी” बताया। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

इरावानी ने दावा किया कि 28 फरवरी से जारी संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों में 1,300 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्र के देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के आरोप पूरी तरह गलत हैं।