आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के कारण देश की बैंकिंग प्रणाली में काफी सुधार हुआ है तथा वाणिज्यिक बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की वसूली में भी मदद मिली है।
उन्होंने सदन में ‘दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025’ पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि विधेयक के माध्यम से आईबीसी में 12 संशोधन प्रस्तावित हैं।
विधेयक पर चर्चा में 40 सदस्यों ने भाग लिया।
मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से इस विधेयक को मंजूरी दी।
वित्त मंत्री ने कहा कि संसद की प्रवर समिति ने विधेयक में कुल 17 बड़ी अनुशंसाएं कीं, जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया।
उनके मुताबिक, सरकार ने एक और सिफारिश को इसमें जोड़ा है कि कर्जदाताओं की समिति को आवेदकों को चयन करने के कारणों को दर्ज करना होगा, इससे पारदर्शिता आएगी।
सीतारमण ने कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता से भारतीय बैकिंग प्रणाली की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि एनपीए की वसूली में इस संहिता की प्रभावी भूमिका रही है। सीतारमण के अनुसार वाणिज्यिक बैंक के एनपीए की कुल वसूली में दिवाला संहिता का 54 प्रतिशत से अधिक का योगदान रहा है।
सीतारमण का कहना है कि आईबीसी का कभी यह बुनियादी मकसद नहीं रहा कि इसे कर्ज वसूली के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आईबीसी की व्यवस्था के कारण अब दिवाला से जुड़े मामलों के निस्तारण में कंपनियां पहले से बहुत बेहतर काम कर रही हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था।