The lost prestige of the Jammu and Kashmir Assembly can be revived through collective efforts: Mufti
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को सरकार और विपक्ष से जम्मू-कश्मीर विधानसभा की ताकत और गरिमा बहाल करने के लिए संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया।
मुफ्ती ने यह टिप्पणी विधानसभा की कार्यवाही के बाद की।
वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन वाली उनकी सरकार गिरने के बाद वह पहली बार सदन में उपस्थित हुई थीं।
पीडीपी प्रमुख प्रश्नकाल के दौरान कुछ देर तक विधानसभा में मौजूद रहीं। उनकी पार्टी के चारों विधायक भी उपस्थित थे, जिनमें से एक रफीक अहमद नाइक ने केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन से संबंधित एक प्रश्न के "संतोषजनक और विस्तृत" उत्तर के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रशंसा की।
मुफ्ती ने कहा, "आज विधानसभा में आकर मुझे अच्छा लगा। मुझे विशेष रूप से अपने पिता (मुफ्ती मोहम्मद सईद) की याद आ गई... हमारी विधानसभा एक बहुत महत्वपूर्ण संस्था है। हालांकि, 2019 के बाद से किसी न किसी रूप में इसका महत्व और अधिकार कम हो गया है।"
उन्होंने उस वर्ष का जिक्र किया जब केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।
मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी संस्थान को धीरे-धीरे पुनर्निर्मित करने के प्रयासों का समर्थन करेगी।
उन्होंने कहा, “पीडीपी अपनी भूमिका जरूर निभाएगी, लेकिन सत्तारूढ़ दल (नेकां) की भी बड़ी जिम्मेदारी है... मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार और विपक्ष के संयुक्त प्रयासों से जम्मू-कश्मीर विधानसभा की खोई हुई ताकत बहाल की जा सकती है।”
पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ने सदन में कई ऐसे विधेयक पेश किए हैं, जिनके लिए राज्य का दर्जा जरूरी नहीं है और जिन्हें “मौजूदा केंद्र शासित ढांचे के भीतर” पारित किया जा सकता है। उन्होंने नए संभाग और जिलों के गठन तथा वर्षों से छोटी जमीन पर रहने वाले गरीब लोगों को स्वामित्व अधिकार देने जैसे विधेयकों का उल्लेख किया।
मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है, खासकर रोजगार, आरक्षण और नियमितीकरण के मुद्दों पर।