अहमदाबाद
वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम विस्फोट मामले में गुजरात हाईकोर्ट मंगलवार को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगा। अदालत का निर्णय सुबह 11 बजे सुनाया जाना निर्धारित है। यह मामला देश के सबसे चर्चित आतंकी हमलों में से एक रहा है, जिसमें 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में लगभग 70 मिनट के भीतर 20 अलग-अलग स्थानों पर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों से पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई थी। विस्फोटों में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और कई सार्वजनिक स्थानों पर भारी नुकसान पहुंचा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। मामले की जांच के बाद कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया और अब गुजरात हाईकोर्ट इस प्रकरण में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाने जा रहा है।
इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वर्ष 2025 के लाल किला कार बम विस्फोट मामले की जांच भी जारी है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विस्फोट में मारे गए लोगों के अवशेषों से संबंधित फोरेंसिक रिपोर्ट अदालत में पेश की है। अदालत ने इस रिपोर्ट के परीक्षण (स्क्रूटनी) के लिए मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है।
एनआईए के अनुसार, नवंबर 2025 में लाल किले के निकट हुए इस हमले में वाहन में लगाए गए उच्च क्षमता वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) का इस्तेमाल किया गया था। इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। धमाके से आसपास की संपत्तियों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा था।
मामले की सुनवाई के दौरान एनआईए ने नौ आरोपियों को विशेष एनआईए अदालत में पेश किया। विशेष न्यायाधीश पीतांबर दत्त ने सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत अगली सुनवाई तक बढ़ा दी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की है।
जांच एजेंसी इस मामले में पहले ही 10 आरोपियों के खिलाफ मुख्य आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है, जिनमें शाहीन सईद सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एनआईए ने जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और एक फरार आरोपी के खिलाफ पूरक आरोपपत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) भी दाखिल किया है, जिस पर अभी अदालत में विचार होना बाकी है।
एनआईए के अनुसार, जमीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद भट को फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। जांच में आरोप लगाया गया है कि दोनों हथियार और गोला-बारूद जुटाने में शामिल थे। एजेंसी का दावा है कि उन्हें उमर, इरफान और आदिल नामक व्यक्तियों से राइफल, पिस्तौल और जिंदा कारतूस उपलब्ध कराए गए थे। जांच में दोनों के प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़े होने का भी आरोप लगाया गया है।
एक ओर जहां पूरे देश की नजरें 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली लाल किला विस्फोट मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया भी लगातार आगे बढ़ रही है।