युवाओं को नेतृत्व का अवसर दें : मौलाना महमूद मदनी

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 16-10-2026
Give youth opportunities for leadership: Maulana Mahmood Madani
Give youth opportunities for leadership: Maulana Mahmood Madani

 

नई दिल्ली।

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने संगठनात्मक मजबूती, दीनी शिक्षा के विस्तार और सामाजिक सेवा को नई गति देने के उद्देश्य से अपना नौवां केंद्रीय छमाही मशविरा राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में आयोजित किया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर की प्रांतीय इकाइयों के अध्यक्षों, महासचिवों और नाज़िमों-ए-तंज़ीम ने भाग लिया।

सम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने संगठन के उद्देश्यों, जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने देशभर के जिम्मेदारों को स्पष्ट संदेश दिया कि मुल्क और मिल्लत की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के बजाय सामूहिक उद्देश्यों को महत्व दिया जाए और युवाओं को आगे बढ़ाकर नई नेतृत्व पीढ़ी तैयार की जाए।

मशविरे में अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच संगठन की शैक्षिक, सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की गई। साथ ही आगामी छह महीनों के लिए विभिन्न विभागों के लक्ष्य निर्धारित किए गए। प्रस्तुत रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि में दीनी शिक्षा के विस्तार, समाज सुधार, युवा सहभागिता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की गईं।

छह महीने में दीनी शिक्षा और सामाजिक सेवा का विस्तार

जमीयत की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में देशभर में 5,352 नए दीनी मक्तब स्थापित किए गए। इसके अतिरिक्त, 5,860 नए स्थानों पर दर्स-ए-कुरआन और 8,848 स्थानों पर दर्स-ए-हदीस की शुरुआत हुई। इस तरह कुल 14,708 नए स्थानों पर कुरआन और हदीस की शिक्षा का सिलसिला शुरू किया गया। संगठन के माध्यम से पहले से ही 63 हजार से अधिक मक्तब संचालित हैं।

युवाओं को संगठनात्मक गतिविधियों और जनसेवा से जोड़ने के लिए विभाग-ए-रफ़ीक़ के तहत 9,400 युवाओं को शामिल किया गया। सामाजिक और शैक्षिक विकास की गतिविधियों को गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 484 गांवों का चयन किया गया।

संगठन ने आगामी छह महीनों में इन गतिविधियों को और व्यापक बनाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं।

प्रमुख उपलब्धियां और आगामी लक्ष्य

1. दीनी मक्तब: पिछले छह महीनों में 5,352 नए मक्तब स्थापित किए गए। आगामी छह महीनों में 5,332 और मक्तब खोलने का लक्ष्य है।

2. दर्स-ए-कुरआन और दर्स-ए-हदीस: 5,860 स्थानों पर कुरआन और 8,848 स्थानों पर हदीस की शिक्षा शुरू की गई।

3. इस्लाह-ए-मुआशरा: नैतिक प्रशिक्षण, सामाजिक सुधार और फिजूलखर्ची की रोकथाम के लिए 7,351 कार्यक्रम आयोजित हुए। अगले छह महीनों में 8,383 कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।

4. विभाग-ए-रफ़ीक़: 9,400 युवाओं को संगठन से जोड़ा गया। आगामी अवधि में 9,753 और युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

5. आदर्श मस्जिदें: धार्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक सेवा के केंद्र के रूप में 1,806 आदर्श मस्जिदें स्थापित की गईं। आगामी छह महीनों में इनकी संख्या बढ़ाकर 2,556 करने का लक्ष्य है।

6. सद्भावना मंच: राष्ट्रीय एकता, आपसी सहयोग और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए 356 कार्यक्रम आयोजित किए गए। अगले चरण में 1,091 कार्यक्रमों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

7. जन विकास सेवा: सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए 484 गांवों का चयन किया गया। आगामी छह महीनों में 748 और गांवों को इस अभियान से जोड़ने की योजना है।

8. संगठनात्मक प्रशिक्षण: कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के लिए 115 कार्यशालाएं आयोजित की गईं। अगले छह महीनों में 386 कार्यशालाएं आयोजित करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, पांच हजार से अधिक संगठनात्मक बैठकें भी हुईं।

'मुल्क और मिल्लत की सेवा हमारी पहली प्राथमिकता हो'

अपने मुख्य संबोधन में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि पिछले छह महीनों में विभिन्न विभागों ने प्रगति की है, लेकिन मिल्लत की जरूरतों और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संगठन की जिम्मेदारियां अभी बहुत व्यापक हैं। इसलिए अधिक मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ काम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि मुल्क और मिल्लत की सेवा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए हर जिम्मेदार के भीतर मिल्लत के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने का जज्बा पैदा करना आवश्यक है। जब यह भावना मजबूत होगी, तो व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और निजी पहचान का महत्व अपने आप कम हो जाएगा।

मौलाना मदनी ने संगठन के पूर्वजों के बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद असाधारण संकल्प और दृढ़ता के साथ काम किया। कठिनाइयों के सामने उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह अपने पूर्वजों के समर्पण और सेवा-भाव को व्यावहारिक जीवन में अपनाए तथा उसी उत्तरदायित्व-बोध के साथ मिल्ली और संगठनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाए।

युवाओं को जिम्मेदारी देकर तैयार करें नया नेतृत्व

मौलाना महमूद मदनी ने युवा पीढ़ी को संगठन की गतिविधियों में अधिक अवसर देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल संगठन से जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जिम्मेदारियां सौंपकर नेतृत्व के योग्य बनाना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वह भविष्य में मौजूदा जिम्मेदारों का प्रभावी विकल्प बन सके। इससे जमीयत का संदेश और उसकी रचनात्मक गतिविधियां देश के हर कोने, गांव और बस्ती तक पहुंचाई जा सकेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मिल्लत के साझा उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए समान विचार रखने वाले लोगों को साथ लेकर चलना आवश्यक है। संगठन की मजबूती सामूहिक प्रयास, सहयोग और जिम्मेदारियों के सही बंटवारे से ही संभव है।

पद और प्रसिद्धि से ऊपर उठकर करें काम: मौलाना सलमान बिजनौरी

जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने अपने संबोधन में कार्यों के पीछे की नीयत और उद्देश्य को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि जब इंसान के भीतर यह भावना पैदा हो जाती है कि वह अपने काम व्यक्तिगत प्रसिद्धि, नाम-नुमाइश और निजी स्वार्थ के बजाय अल्लाह तआला की प्रसन्नता के लिए कर रहा है, तो काम छोटा हो या बड़ा, उसकी वास्तविक कीमत बनी रहती है।

इसके विपरीत, केवल पद, प्रतिष्ठा और दिखावटी प्रसिद्धि पर आधारित प्रयास स्थायी नहीं होते। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं से सेवा, ईमानदारी और निस्वार्थ भाव को अपने कामकाज का आधार बनाने की अपील की।

दीनी शिक्षा के विस्तार और मक्तबों को मजबूत करने पर जोर

सम्मेलन के एक महत्वपूर्ण सत्र में जमीयत उलमा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने दीनी तालीमी बोर्ड और मक्तबों के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी तथा कई सुझाव पेश किए।

उन्होंने बुनियादी दीनी शिक्षा के विस्तार, नए मक्तबों की स्थापना, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों की प्रभावी निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस सिलसिले में प्रांतीय इकाइयों की जिम्मेदारियों और आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।

मशविरे में इस बात पर जोर दिया गया कि दीनी शिक्षा को अधिक व्यवस्थित बनाया जाए और मक्तबों के संचालन एवं शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए नियमित प्रयास किए जाएं।

विभिन्न सत्रों में संगठनात्मक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

तीन दिवसीय मशविरे के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी, उपाध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद अमीन, अध्यक्ष मजलिस-ए-कायमा मुफ्ती रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी, जमीयत उलमा कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी और जमीयत उलमा असम के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल कादिर ने की। इन वरिष्ठ विद्वानों ने भी अपने विचार रखे।

विभिन्न विभागों की रिपोर्ट और प्रस्तुतियां ओवैस सुल्तान खान (JEM), मुफ्ती महदी हसन ऐनी (सद्भावना मंच), डॉ. शब्बीर मुश्ताक मीर (खैर ऐप एवं प्रशिक्षण रिपोर्ट), मौलाना मुहम्मद अखलाक (रफ़ीक़) तथा मौलाना मुहम्मद उमर कासमी (इस्लाह-ए-मुआशरा, आदर्श मस्जिदें एवं ऐप) ने पेश कीं।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने पैरा-लीगल प्रशिक्षण के संबंध में जानकारी दी। प्रस्तुतियों के आधार पर संगठनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

आदर्श मस्जिदों और फैमिली काउंसलिंग सेंटर पर महत्वपूर्ण निर्णय

सम्मेलन की बैठकों में संगठनात्मक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों की समीक्षा के साथ विभिन्न विभागों की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।

इस दौरान आदर्श मस्जिदों के विकास, प्रत्येक संगठनात्मक इकाई में इस्लाह-ए-मुआशरा समिति के गठन और आदर्श जिलों में फैमिली काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

इन पहलों का उद्देश्य धार्मिक मार्गदर्शन के साथ सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना, पारिवारिक समस्याओं के समाधान में सहयोग करना और स्थानीय स्तर पर जनसेवा की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

तिलावत-ए-कुरआन से हुई शुरुआत, पोकरण के संस्थान ने की मेजबानी

केंद्रीय मशविरे की विभिन्न बैठकों का आरंभ जमीयत उलमा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण के विद्यार्थियों ने नात-ए-पाक पेश की।

सम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद के केंद्रीय कार्यालय के कई जिम्मेदार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मेजबान और संगठन के उपाध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद अमीन की ओर से स्वागत किया गया। मदरसे के शिक्षक मुफ्ती फजलुद्दीन कासमी ने स्वागत भाषण दिया।

दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण के शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रबंधन ने सम्मेलन की व्यवस्थाओं तथा मेहमानों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तीन दिवसीय केंद्रीय मशविरे का मुख्य संदेश यही रहा कि संगठन की भावी मजबूती के लिए दीनी शिक्षा का विस्तार, समाज सुधार, ग्रामीण विकास और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ सेवा-भाव को सर्वोपरि रखना आवश्यक है। निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आगामी छह महीने जमीयत की प्रांतीय और क्षेत्रीय इकाइयों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।