आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 2026 की शुरुआत सतर्क रुख के साथ की है। पिछले साल के अपने बिकवाली के सिलसिले को जारी रखते हुए उन्होंने जनवरी के पहले दो कारोबारी सत्रों में भारतीय इक्विटी से 7,608 करोड़ रुपये निकाले।
इससे पहले उन्होंने 2025 में 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी। ऐसा अस्थिर मुद्रा, वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिकी शुल्क संबंधी चिंताओं और बाजार के बढ़े हुए मूल्यांकन के कारण हुआ।
एफपीआई की बिकवाली के दबाव ने 2025 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में हुई गिरावट में लगभग पांच प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में यह रुख बदल सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि इस साल एफपीआई की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि बेहतर होते घरेलू बुनियादी कारक निवेश को आकर्षित करना शुरू कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार की संभावना आने वाले महीनों में सकारात्मक एफपीआई प्रवाह के लिए शुभ संकेत है।a