श्रीनगर
फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि संघर्ष और टकराव से किसी भी तरह का समाधान नहीं निकलता, बल्कि यह केवल विनाश और अस्थिरता को जन्म देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पड़ोसी देश को यह समझना चाहिए कि लंबे समय से जारी तनाव अब समाप्त होना चाहिए और शांति की दिशा में कदम बढ़ाना जरूरी है।
श्रीनगर में रंगरेठ स्थित जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (जेएकेएलआई) रेजिमेंट में आयोजित एक सैन्य कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अब्दुल्ला ने यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि संघर्ष की स्थिति किसी भी देश या समाज के लिए लाभकारी नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमारा पड़ोसी यह समझेगा कि संघर्ष से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। यह केवल विनाश लाता है। यह संघर्ष बहुत लंबे समय से चल रहा है और इसे अब समाप्त किया जाना चाहिए।” उनके इस बयान को भारत-पाक संबंधों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने की अपील की गई है।
पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रहे फारूक अब्दुल्ला ने इस दौरान भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से जेएकेएलआई रेजिमेंट के जवानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे देश के विभिन्न हिस्सों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें और अपनी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाएं।
अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में विश्व शांति की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह प्रार्थना करते हैं कि दुनिया में कहीं भी युद्ध और हिंसा न हो और सभी देशों के बीच आपसी समझ और सौहार्द बढ़े। उन्होंने कहा कि शांति ही विकास और स्थिरता की असली कुंजी है, जबकि संघर्ष केवल मानवता को पीछे धकेलता है।
उनके बयान को राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शांति समर्थक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्षेत्र में संवाद और स्थिरता की आवश्यकता को और मजबूत करते हैं, खासकर जब सीमा पार तनाव की स्थिति बनी रहती है।
कुल मिलाकर, फारूक अब्दुल्ला का यह संदेश संघर्ष की बजाय बातचीत और शांति को प्राथमिकता देने की अपील करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।