नई दिल्ली/श्रीनगर
केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1,086 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह घोषणा हाल ही में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा बजट पेश करते हुए की गई। इस कदम के माध्यम से सरकार ने जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी को मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को गति देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
कई दशकों तक कश्मीर का विकास अधिकतर वादों तक सीमित रहा। राजनीतिक अस्थिरता, कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ और सुरक्षा चुनौतियों के कारण परिवहन और बुनियादी ढांचे में पिछड़ापन रहा। मौसम और सड़क बंद होने की समस्याओं ने रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया। लेकिन अब यह कहानी बदल रही है। पहाड़ों में बिछते स्टील ट्रैक और सुरंगें क्षेत्र में व्यापक बदलाव का प्रतीक बन गई हैं।
सबसे महत्वपूर्ण परियोजना उधमपुर-सринаगर-बरामूला रेल लिंक (USBRL) है। यह 272 किलोमीटर लंबी परियोजना कई दशकों से विलंबित रही, लेकिन अब यह इंजीनियरिंग का बड़ा कारनामा बन गई है। इसमें 900 से अधिक पुल और दर्जनों सुरंगें शामिल हैं, जिनमें विश्व का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज, चेनाब रेल ब्रिज भी शामिल है। USBRL न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कश्मीर को सालभर कनेक्टिविटी देने में भी क्रांतिकारी साबित हो रही है।
रेल सेवाओं के विस्तार से बारामूला से सांगलदान तक के क्षेत्र अब आर्थिक गतिविधियों के करीब आ गए हैं। किसान, व्यापारी, छात्र और मजदूर तेज़, भरोसेमंद और किफायती परिवहन का लाभ उठा रहे हैं। इससे क्षेत्र में न केवल यात्रा आसान हुई है, बल्कि लोगों के मानसिक दृष्टिकोण में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
इसके अलावा, जम्मू-स्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस का परिचालन भी इस कनेक्टिविटी में एक महत्वपूर्ण कदम है। सर्दियों में जब सड़क मार्ग अक्सर अवरुद्ध रहते हैं, तब यह ट्रेन सुरक्षित और तेज़ यात्रा सुनिश्चित करती है।
भविष्य में बारामूला-उरी और जम्मू-राजौरी रेल परियोजनाओं से दूरदराज के क्षेत्रों का विकास संभव होगा। ये मार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पर्यटन के नए अवसर खोलेंगे।
रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से पर्यटन, माल ढुलाई, रोजगार और लॉजिस्टिक दक्षता में भी वृद्धि हो रही है। जम्मू-कश्मीर में रेलवे का विस्तार अब केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक जीवन रेखा बनने की क्षमता रखता है।
कश्मीर का विकास अभी अधूरा है, लेकिन रेल परियोजनाओं का विस्तार लंबे समय की योजनाओं और स्थिर विकास की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है। जहाँ दूरी कभी कनेक्शन को बाधित करती थी, वहीं अब रेलवे न केवल भौगोलिक बल्कि मानसिक दूरी भी घटा रही है।