दिल्ली मेट्रो मारपीट केस: रिटायर्ड IAS अधिकारी और बेटे को मृत्युदंड देने की मांग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 13-10-2026
Delhi Metro assault case: Brother seeks death penalty for retired IAS officer, son
Delhi Metro assault case: Brother seeks death penalty for retired IAS officer, son

 

नई दिल्ली 

दिल्ली मेट्रो ट्रेन के अंदर कथित मारपीट के बाद मरने वाले 48 साल के पवन शर्मा के भाई ने आरोपी - एक रिटायर्ड IAS अधिकारी और उनके बेटे - के लिए मौत की सज़ा की मांग की है। पीड़ित के भाई के अनुसार, आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मृतक के छोटे भाई दीपक शर्मा ने कहा कि परिवार न्याय चाहता है। पवन शर्मा 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर सीनियर सिटिज़न सीट को लेकर हुई बहस के बाद गिर पड़े थे। दीपक ने कहा, "हमारी बस यही मांग है कि हमें न्याय मिले और उन्हें कम से कम मौत की सज़ा (फांसी) दी जाए।"
 
यह घटना 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर हुई थी। आरोपियों की पहचान 65 साल के संजय प्रताप सिंह और उनके 36 साल के बेटे सिद्धार्थ सिंह के तौर पर हुई है। FIR 9 अक्टूबर को दर्ज की गई थी। FIR के अनुसार, घटना के समय मृतक की माँ दुर्गा शर्मा अपने बड़े बेटे पवन शर्मा के साथ गुरुग्राम से दिल्ली के यमुना विहार स्थित अपने घर जा रही थीं। 8 अक्टूबर को शाम करीब 4 बजे, माँ और बेटा द्वारका सेक्टर 21 से मेट्रो ट्रेन में चढ़े और सीनियर सिटिज़न के लिए आरक्षित सीटों पर बैठ गए। शिकायत के अनुसार, जब ट्रेन सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पहुँची, तो दो आदमी ट्रेन में चढ़े और कथित तौर पर उनसे बदतमीज़ी से बात करते हुए सीटें खाली करने को कहा।
 
पवन ने उन लोगों के बात करने के तरीके पर आपत्ति जताई और कहा कि वे सीटें खाली कर देंगे। FIR के अनुसार, जब माँ और बेटा उठने लगे, तो पवन ने बुजुर्ग व्यक्ति पर कोई टिप्पणी की, जिसके बाद उस व्यक्ति ने पवन का कॉलर पकड़ा और उसे थप्पड़ मारा।
जब पवन ने मारपीट का विरोध किया, तो बुजुर्ग आरोपी के साथ आए छोटे व्यक्ति ने कथित तौर पर पवन की गर्दन पकड़ ली और उसकी छाती पर कई बार मुक्के मारे। दुर्गा शर्मा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो बुजुर्ग व्यक्ति ने उनके हाथ पकड़ लिए और उन्हें मारपीट रोकने से रोक दिया।
 
इसके बाद पवन ट्रेन के फ़र्श पर गिर पड़े और बेहोश हो गए। शिकायत के अनुसार, उन्हें 'सेंट्रलाइज़्ड एक्सीडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज़' की एम्बुलेंस से लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने अस्पताल पहुँचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बारे में बात करते हुए दीपक ने बताया कि परिवार को पता चला कि मेट्रो के अंदर झगड़ा हुआ था और अस्पताल ले जाए जाने से पहले ही उनके भाई गिर पड़े थे। उन्होंने कहा, "हाँ, हमें यही पता चला—कि मेट्रो के अंदर झगड़ा हुआ, जिसके बाद मेरे भाई वहीं बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़े, और जब तक उन्हें अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।"
 
मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट में पवन के दाहिने गाल पर कई छोटे-छोटे निशान, गर्दन के पास छाती पर चोट के निशान और दाहिने हाथ के अंगूठे पर खरोंच का ज़िक्र है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वह बेहोश थे, कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे और बयान देने की हालत में नहीं थे। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दीपक ने बताया कि पवन 48 साल के थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं।