दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्थगन मांगने की ‘संस्कृति’ की आलोचना की

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 04-01-2026
Delhi High Court criticises 'culture' of seeking adjournments
Delhi High Court criticises 'culture' of seeking adjournments

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
aदिल्ली उच्च न्यायालय ने "स्थगन की संस्कृति" की आलोचना करते हुए कहा है कि अंधाधुंध तरीके से स्थगन का अनुरोध किया जाता है और यह सोचना गलत है कि अनुरोध करने पर मामले में स्थगन प्रदान कर दिया जाएगा।
 
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा एक मामले में वकील के अनुपस्थिति रहने के लिए लगाए गए 20,000 रुपये के जुर्माने को माफ करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
 
यह जुर्माना पिछले साल मई में उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ द्वारा लगाया गया था। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की इस दलील पर गौर किया कि उसकी वकील अधीनस्थ अदालतों में अन्य मामलों में व्यस्त होने के कारण इस मामले में पेश नहीं हो सकीं।
 
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उनकी वकील दो बच्चों की एकल मां हैं और उन्हें "अपने जीवन में कई कठिनाइयों" का सामना करना पड़ रहा है।
 
अदालत ने 10 दिसंबर के एक आदेश में कहा, "दुर्भाग्य से, अदालतों में समय के साथ स्थगन की एक संस्कृति विकसित हो गई है और यह गलत धारणा बन गई है कि मामला चाहे जो भी हो, अनुरोध करने पर स्थगन प्रदान किया जाएगा।"
 
इसमें कहा गया कि प्रतिवादी के वकील या अदालत के समय का कोई ध्यान रखे बिना अंधाधुंध तरीके से स्थगन का अनुरोध किया जा रहा है।