दिल्ली HC ने दिल्ली में कृषि आय पर टैक्स लगाने की मांग वाली PIL पर सुनवाई से इनकार किया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 13-05-2026
Delhi HC refuses to entertain PIL seeking tax on agricultural income in Delhi
Delhi HC refuses to entertain PIL seeking tax on agricultural income in Delhi

 

नई दिल्ली
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसमें अधिकारियों को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कृषि आय पर टैक्स लगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने सरकार को दिल्ली में कृषि आय पर टैक्स लगाने के लिए एक नीति बनाने का निर्देश देने वाला कोई आदेश (mandamus) जारी करने से मना कर दिया।
 
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने याचिका को "पूरी तरह से गलत धारणा पर आधारित" बताया और टैक्स नीति से जुड़े मामलों में दखल देने से इनकार कर दिया। बेंच ने टिप्पणी की कि कोर्ट न्यायिक आदेशों के ज़रिए सरकार को कोई कानून बनाने या कोई टैक्स व्यवस्था लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता। याचिका में अधिकारियों से दिल्ली में ज़्यादा आय वाली कृषि कमाई पर टैक्स लगाने के लिए कानूनी और नीतिगत उपायों पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें तर्क दिया गया था कि कृषि आय को लगातार दी जा रही छूट से वित्तीय असमानता पैदा होती है और टैक्स देने वालों के बीच मनमाना वर्गीकरण होता है।
 
याचिकाकर्ता के अनुसार, जहाँ वेतनभोगी कर्मचारी, व्यापारी और टैक्स देने वालों की अन्य श्रेणियाँ टैक्स के दायरे में आती हैं, वहीं कुछ ज़्यादा आय वाले लोग कथित तौर पर कृषि आय की श्रेणी के तहत छूट का लाभ उठाते रहते हैं।
 
याचिका संविधान के अनुच्छेद 246 और राज्य सूची की प्रविष्टि 46 पर आधारित थी, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि राज्यों के पास कृषि आय पर टैक्स लगाने की कानूनी शक्ति है। इसमें 'गवर्नमेंट ऑफ़ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ़ दिल्ली एक्ट, 1991' की धारा 22(1)(a) का भी ज़िक्र किया गया था, जिसमें उचित कानूनी उपायों पर विचार करने की मांग की गई थी।
 
याचिका में आगे आरोप लगाया गया था कि दिल्ली में ऐसी टैक्स व्यवस्था न होने से संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 265 का उल्लंघन होता है और टैक्स देने वालों के साथ असमान व्यवहार होता है।