Defence Minister Rajnath Singh felicitates Armed Services' athletes for record 27-medal haul at 2026 Asian Games
नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को सशस्त्र बलों के उन खिलाड़ियों को सम्मानित किया, जिन्होंने हाल ही में जापान में हुए एशियाई खेलों में 27 पदक (छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य) जीते। रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में 'सर्विसेज' (सशस्त्र बलों की टीमों) के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का जश्न मनाने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी भी शामिल हुए। तीनों सेनाओं के कुल 92 खिलाड़ियों ने 19 खेलों में हिस्सा लिया और भारत के चौथे स्थान पर रहने में अहम योगदान दिया। भारतीय दल ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल थे। भारत की कुल पदक संख्या में 'सर्विसेज' के खिलाड़ियों का योगदान 32 प्रतिशत और स्वर्ण पदकों में 28.57 प्रतिशत रहा।
बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों में नायब सूबेदार नीरू ढांडा शामिल थीं, जिन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। वह इन खेलों में व्यक्तिगत महिला ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने दो रजत और एक कांस्य पदक जीता और एशियाई खेलों के एक ही संस्करण में तीन व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष ट्रैक-एंड-फील्ड एथलीट बने। हवलदार सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में 2:11:37 के राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय के साथ रजत पदक जीता और एशियाई खेलों में मैराथन पदक के लिए भारत के 44 साल के इंतजार को खत्म किया। नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने भी पुरुषों की ऊंची कूद (हाई जंप) में ऐतिहासिक पदक जीता; यह 56 वर्षों में इन खेलों में इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक था।
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए, सिंह ने उनकी सफलता का श्रेय अनुशासन, कड़ी मेहनत, टीम भावना और खेल में उत्कृष्टता को दिया। उन्होंने कहा कि मेडल जीतने के सफ़र में बहुत ज़्यादा लगन, सुबह-सुबह ट्रेनिंग, जिम सेशन, चोटें, ठीक होने की प्रक्रिया और लगातार कोशिशें शामिल होती हैं। साथ ही, खिलाड़ियों को अपनी यूनिट की ड्यूटी और खेल की तैयारी के बीच तालमेल बिठाना होता है और परिवार से दूर भी रहना पड़ता है।
जो खिलाड़ी हिस्सा तो ले पाए लेकिन जीत नहीं सके, उनसे बात करते हुए सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि असली हार तो हार मान लेने में है। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी ने किसी न किसी तरह देश और डिफेंस फोर्सेज़ का मान बढ़ाने में योगदान दिया है। सर्विसेज़ के खिलाड़ियों की काबिलियत पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। सिंह ने टैलेंटेड खिलाड़ियों की पहचान करने, उनकी काबिलियत को निखारने, साइंटिफिक ट्रेनिंग और वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स सुविधाएँ देने और उन्हें इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन के लिए तैयार करने में 'मिशन ओलंपिक विंग' की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कोच, सपोर्ट स्टाफ़, फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और खिलाड़ियों के परिवारों के योगदान को भी माना और कहा कि कोई भी चैंपियन अकेले नहीं बनता। सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के उस संकल्प को दोहराया जिसके तहत भारत के स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक ट्रेनिंग सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए बेहतर मौकों पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मकसद सिर्फ़ भागीदारी बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत को ग्लोबल स्पोर्ट्स की दुनिया में एक बड़ी ताकत के तौर पर स्थापित करना है।
भारतीय खेलों में सर्विसेज़ के अहम योगदान पर सिंह ने कहा कि डिफेंस फोर्सेज़ ने लगातार ऐसे खिलाड़ी तैयार किए हैं जो न सिर्फ़ अपनी शारीरिक ताकत, बल्कि अनुशासन, सब्र, लीडरशिप और मुश्किल हालात में भी अपने लक्ष्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। सिंह ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए एक फोकस्ड और व्यवस्थित अप्रोच अपनाने की भी बात कही और ट्रेनर्स व सपोर्ट स्टाफ़ से कहा कि वे पूरी लगन और प्रोफेशनलिज़्म के साथ खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करते रहें।
उन्होंने उनसे ऊँचे लक्ष्य तय करने और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कहा। इस मौके पर आर्मी स्टाफ़ के चीफ़ जनरल धीरज सेठ और दूसरे सीनियर अधिकारी मौजूद थे।