आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ऑनलाइन ठग नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) अनुप्रयोगों की सुरक्षा प्रणाली को चकमा देकर वित्तीय लेनदेन को अंजाम दे रहे हैं। साइबर खुफिया कंपनी क्लाउडसेक की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने संदेश भेजने से जुड़े मंच टेलीग्राम पर कम से कम 20 सक्रिय समूहों की पहचान की है। प्रत्येक समूह में 100 से अधिक सदस्य हैं जहां ‘‘डिजिटल लुटेरा’’ नामक टूलकिट पर चर्चा की जा रही है, उसे साझा किया जा रहा है और उसका उपयोग भी किया जा रहा है।
क्लाउडसेक के अनुसंधानकर्ता (खतरा) शोभित मिश्रा ने कहा, ‘‘ यह केवल यूपीआई से जुड़ा एक और हानिकारक सॉफ्टवेयर नहीं है। डिजिटल लुटेरा उपकरण प्रणाली पर भरोसे की संरचना पर हमला करता है। जब संचालन तंत्र ही प्रभावित हो जाता है तो ‘सिम-बाइंडिंग’ और हस्ताक्षर जांच जैसी पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्थाएं भरोसेमंद नहीं रहतीं। यदि इसे नहीं रोका गया तो यह डिजिटल भुगतान प्रणाली में बड़े पैमाने पर खातों पर पकड़ बनाने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है।’’