नई दिल्ली:
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत देते हुए आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit-CAD) घटकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.6 प्रतिशत तक आ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और निर्यात में सुधार भारत के बाहरी क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2026 के दौरान भारत के वस्तु निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के साथ-साथ गैर-तेल निर्यात का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आंकड़ों के अनुसार, तेल निर्यात मई 2025 के 5.4 अरब डॉलर से बढ़कर मई 2026 में 8.4 अरब डॉलर हो गया, जो सालाना आधार पर 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं गैर-तेल निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 36.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले 24 महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृषि उत्पादों और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिला है। पिछले दो महीनों में गिरावट का सामना करने के बाद कृषि निर्यात में 8.8 प्रतिशत और रत्न एवं आभूषण निर्यात में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे निर्यात क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन मिला है।
दूसरी ओर, गैर-तेल और गैर-सोना आयात मई में 47 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 प्रतिशत अधिक है। हालांकि आयात बढ़ने के बावजूद व्यापार घाटे में बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में भारत का व्यापार घाटा 28.2 अरब डॉलर रहा, जबकि अप्रैल में यह 28.4 अरब डॉलर था। तेल व्यापार घाटा बढ़कर 14.3 अरब डॉलर हो गया, लेकिन गैर-तेल और गैर-सोना व्यापार घाटे में कमी आने तथा सोने के आयात में गिरावट से इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो गया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मासिक अनुमान के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत का चालू खाता 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष (Surplus) में रहा। एक वर्ष पहले इसी अवधि में 4.8 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया था। यह बदलाव भारत के बाहरी क्षेत्र में मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
आईसीआईसीआई बैंक का मानना है कि आरबीआई द्वारा हाल में उठाए गए कदमों से विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा और भुगतान संतुलन (Balance of Payments-BoP) वित्त वर्ष 2027 में अधिशेष में लौट सकता है। पिछले दो वर्षों से भुगतान संतुलन दबाव में था, लेकिन अब परिस्थितियां बेहतर होती दिखाई दे रही हैं।
रिपोर्ट में पश्चिम एशिया की हालिया परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक नरम हुई हैं। यदि तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं और खाड़ी देशों को निर्यात में गिरावट नहीं आती, तो भारत का चालू खाता घाटा अनुमान से भी कम रह सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात में मजबूती, नियंत्रित तेल कीमतें और बढ़ता विदेशी निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन कारकों की वजह से रुपये को भी निकट अवधि में समर्थन मिल सकता है और वित्त वर्ष 2027 में भारत का भुगतान संतुलन अधिशेष में लौटने की संभावना मजबूत हुई है।