न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन का स्वतः संज्ञान लिया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 13-03-2026
Court takes suo motu cognizance of illegal sand mining in National Chambal Sanctuary
Court takes suo motu cognizance of illegal sand mining in National Chambal Sanctuary

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के समक्ष उत्पन्न खतरों का शुक्रवार को स्वतः संज्ञान लिया।
 
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि न्यायालय ने समाचार पत्रों में हाल में प्रकाशित उन खबरों का संज्ञान लिया है, जिनमें उन इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन को रेखांकित किया गया है, जहां लुप्तप्राय घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम जारी है।
 
न्यायालय ने कहा कि अवैध खनन के कारण लुप्तप्राय घड़ियालों को स्थानांतरित होना पड़ रहा है।
 
पीठ ने कहा कि यहां तक कि उन इलाकों में भी अवैध खनन हो रहा है जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने घड़ियाल छोड़े थे।
 
न्यायालय ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया, ‘‘आवश्यक निर्देश लेने के लिए मामले को भारत के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए।’’
 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले साल फरवरी में मुरैना स्थित अभयारण्य में चंबल नदी में 10 घड़ियाल छोड़े थे।
 
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है। यह 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला तीन राज्यों का एक संरक्षित क्षेत्र है। लुप्तप्राय घड़ियाल के अलावा, यह लाल मुकुट कछुआ प्रजाति और लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन का भी आवास है।
 
राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं के संगम के पास चंबल नदी पर स्थित इस अभयारण्य को पहले 1978 में मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था लेकिन अब तीनों राज्य संयुक्त रूप से इसका प्रशासन संभालते हैं और इस लंबा एवं संकरे क्षेत्र को तीनों ने आरक्षित घोषित किया है।