नई दिल्ली
दिल्ली हाई कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की गई है। यह याचिका सिविल राइट्स संगठन Social Jurist ने दाखिल की है। उनके वकील अशोक अग्रवाल हैं।याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया। मामला सरकारी स्कूलों के बच्चों को किताबें न मिलने से जुड़ा है। कहा गया है कि करीब 10 लाख छात्रों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। ये छात्र कक्षा एक से आठ तक के हैं।
यह मामला बुधवार को सुनवाई के लिए आ सकता है। याचिका Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 11 और 12 के तहत दायर की गई है। साथ ही संविधान के Article 215 of the Constitution of India का भी हवाला दिया गया है।
याचिका में कहा गया है कि पहले भी कोर्ट ने इस मुद्दे पर आदेश दिए थे। अप्रैल 2024 में शिक्षा सचिव ने कोर्ट को भरोसा दिया था। उन्होंने कहा था कि सभी छात्रों को समय पर किताबें और कॉपी दी जाएंगी। इसके बाद जुलाई 2024 में कोर्ट ने इन आश्वासनों को रिकॉर्ड में लिया और सख्त पालन के निर्देश दिए।
लेकिन अब हालात अलग हैं। 2026 27 का नया सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। इसके कई हफ्ते बीत गए हैं। फिर भी बच्चों को जरूरी किताबें नहीं मिली हैं। याचिका में कहा गया है कि इससे पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि शिक्षा विभाग ने खुद निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के अनुसार मार्च के अंत तक किताबें मिल जानी चाहिए थीं। या फिर सत्र शुरू होते ही बच्चों के पास किताबें होनी चाहिए थीं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
एक और चिंता की बात सामने आई है। स्कूल 9 मई से गर्मी की छुट्टी के लिए बंद हो जाएंगे। इसके बाद 1 जुलाई को खुलेंगे। यानी बच्चों के पास करीब तीन महीने तक किताबें नहीं होंगी। इससे उनकी पढ़ाई में बड़ा अंतर आ सकता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह स्थिति शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है। बच्चों को पुरानी या इस्तेमाल की हुई किताबों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यह पर्याप्त नहीं है। यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिका में Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 का भी जिक्र किया गया है। साथ ही संविधान के Article 21A of the Constitution of India का हवाला दिया गया है। इसमें शिक्षा को मौलिक अधिकार माना गया है।
अंत में याचिका में कहा गया है कि यह जानबूझकर की गई लापरवाही है। इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। कानून के अनुसार सजा दी जाए।
अब सबकी नजर कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। यह मामला लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है।