आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे एवं अंतिम चरण के तहत बुधवार को होने वाला मतदान तय करेगा कि क्या तृणमूल कांग्रेस अब भी अपने गढ़ पर कब्जा बनाए रखेगी या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसमें अपनी पकड़ मजबूत कर आखिरकार राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ पहुंचने में सफल होगी।
चुनाव के दूसरे चरण के तहत बुधवार को राज्य विधानसभा की 142 सीट के लिए मतदान होगा।
पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में उत्तर बंगाल और आस-पास के जिलों में भाजपा की पारंपरिक पकड़ की परीक्षा हुई और अब दूसरे चरण में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ - कोलकाता, हावड़ा, उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना, नादिया, हुगली और पूर्वी बर्धमान - के मुकाबलों पर नजर रहेगी। इन इलाकों का परिणाम चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
दूसरे चरण में जिन 142 सीट पर मतदान होना है उनमें से तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में 123 सीट जीती थीं, भाजपा ने सिर्फ 18 और ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ (आईएसएफ) ने एक सीट हासिल की थी।
भाजपा के तमाम प्रयासों के बावजूद पांच साल पहले ममता बनर्जी की पार्टी ने दक्षिण बंगाल में शानदार जीत हासिल की और आसानी से सत्ता पर कब्जा किया।
भवानीपुर विधानसभा सीट पर भी इसी चरण में मतदान होना है, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ है और भाजपा ने यहां नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है।
तृणमूल कांग्रेस के लिए इन इलाकों पर कब्जा बनाए रखना अहम है, जिससे उसके लगातार चौथी बार सत्ता में आने का रास्ता पूरी तरह से खुला रहेगा।
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘यह हमेशा से हमारा सबसे मजबूत क्षेत्र रहा है तथा 2021 विधानसभा से लेकर 2024 के लोकसभा चुनावों में भी यहां के लोगों ने हमारा साथ दिया। अगर हम इस क्षेत्र में फिर से जीत दर्ज करते हैं, तो बंगाल में ममता बनर्जी की ही सरकार बनेगी।’’