CJI सूर्यकांत ने NHRC के स्थापना दिवस पर मानवाधिकार सम्मेलन में लिया हिस्सा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 12-10-2026
CJI Surya Kant addresses NHRC Foundation Day event, participates in conference on human rights
CJI Surya Kant addresses NHRC Foundation Day event, participates in conference on human rights

 

नई दिल्ली 

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने सोमवार को कहा कि पानी तक पहुँच का मतलब सिर्फ़ घरों में नल का कनेक्शन होना नहीं है। उन्होंने ज़ोर दिया कि सूखे पाइप से पानी मिलने का वादा पूरा नहीं हो सकता और दूषित पानी जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस समारोह और 'जल – जीवन का अमृत' विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए, CJI ने कहा कि सुरक्षित और भरोसेमंद पानी तक पहुँच मानवीय गरिमा सुनिश्चित करने और संवैधानिक अधिकारों को पूरा करने के लिए ज़रूरी है।
 
उन्होंने कहा, "सिर्फ़ नल होना पानी तक पहुँच के बराबर नहीं है। जो पाइप सूखा रहता है, वह उस वादे को पूरा नहीं कर सकता जो वह पाइप दिखाता है। और आर्सेनिक, फ्लोराइड या अन्य हानिकारक पदार्थों से दूषित पानी कोई सेवा नहीं है; यह जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा है।" पानी और मानवाधिकारों के बीच संबंध पर प्रकाश डालते हुए, CJI सूर्य कांत ने कहा कि पानी स्वास्थ्य को बनाए रखता है, शिक्षा को संभव बनाता है, गरिमा की रक्षा करता है और उन स्थितियों को आकार देता है जिनमें परिवार रहते हैं और काम करते हैं।
 
उन्होंने कहा, "जिस समुदाय के पास पानी तक भरोसेमंद पहुँच नहीं है, वह उस गरिमा का पूरा आनंद नहीं ले सकता जिसका वादा हमारा संविधान करता है। इसलिए, पानी कोई अलग-थलग अधिकार नहीं है। यह उन स्थितियों में से एक है जो हर दूसरे अधिकार को पूरा करना संभव बनाती हैं।" CJI ने पानी से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया और कहा कि सरकारों, अदालतों, मानवाधिकार आयोगों, नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों - सभी की इसमें भूमिका है।
 
उन्होंने कहा कि सरकारों को लोगों तक पानी पहुँचाने के लिए सिस्टम बनाने और उन्हें बनाए रखने की ज़रूरत है, जबकि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर अदालतों को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोगों को शिकायतों की जाँच करनी चाहिए, सिस्टम की कमियों की पहचान करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चिंताओं पर संस्थागत ध्यान दिया जाए। भावी पीढ़ियों के प्रति ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए, सूर्य कांत ने जलभंडारों (एक्विफ़र) को खत्म करने, नदियों को प्रदूषित करने और पीने के पानी के स्रोतों से समझौता करने के खिलाफ़ चेतावनी दी।
 
उन्होंने कहा, "इसलिए पानी के अधिकार को न केवल वर्तमान के अधिकार के रूप में, बल्कि भविष्य के प्रति ज़िम्मेदारी के रूप में भी समझा जाना चाहिए।" नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) की भूमिका पर CJI ने कहा कि इस संस्था ने अपने 33 साल के कार्यकाल में 24 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज किए और 23 लाख से ज़्यादा मामलों का निपटारा किया, जिसकी निपटान दर 98 प्रतिशत से ज़्यादा रही। कमीशन को संविधान के वादों का संरक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि उन लोगों तक पहुँचने में इसकी भूमिका खास तौर पर अहम है जिन्हें अदालतों तक पहुँचने में मुश्किल होती है।
 
उन्होंने कहा, "अगर संविधान एक वादा है, तो कमीशन उसके संरक्षकों में से एक है। यह वहाँ जाता है जहाँ अदालत आसानी से नहीं पहुँच सकती; यह उनकी बात सुनता है जो आसानी से बोल नहीं सकते, और यह बिना किसी के कहे खुद भी कार्रवाई कर सकता है।" CJI ने हाशिए पर मौजूद समुदायों, विचाराधीन कैदियों, प्रवासी मज़दूरों, बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
 
उन्होंने NHRC की मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च करने और अपने रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने के लिए भी उसकी तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि इस पहल से नागरिक शिकायतें दर्ज करा सकेंगे, उनकी प्रगति को ट्रैक कर सकेंगे और जानकारी हासिल कर सकेंगे, जिससे कमीशन तक लोगों की पहुँच आसान हो जाएगी।