आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्र ने पंजाब के तीन कानूनों सहित पांच राज्य स्तरीय कानूनों के प्रावधान केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ तक विस्तारित किए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह कदम शासन और नियामकीय सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा जीवन-यापन एवं कारोबार करने को आसान बनाना है।
उन्होंने कहा कि ये प्रावधान पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत अधिसूचनाओं के जरिये लागू किए गए हैं। यह चंडीगढ़ में उपयुक्त राज्य कानूनों को विस्तारित करने की स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है, क्योंकि चंडीगढ़ का अपना विधानमंडल नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि ये सभी कदम चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश में मौजूदा कानूनी ढांचे की कमियों को दूर करने, नियमन में अधिक स्पष्टता एवं समानता लाने, नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने तथा प्रभावी शासन को समर्थन देने का व्यापक प्रयास हैं।
केंद्र ने ये अधिसूचनाएं छह मई को जारी कीं। इन सुधारों में पंजाब राज्य के तीन कानूनों का विस्तार शामिल है।
भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2001 और 2003 संपत्तियों के मूल्यांकन और स्टाम्प शुल्क संग्रह के लिए मजबूत ढांचा पेश करते हैं। इनमें कम मूल्यांकन का पता लगाने और उसे सुधारने की स्पष्ट व्यवस्था भी शामिल है, जिससे संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और शुल्क चोरी की गुंजाइश कम होगी।
पंजाब आबादी देह (अधिकार अभिलेख) अधिनियम, 2021 उन आबादी क्षेत्रों में स्वामित्व अधिकारों के सर्वेक्षण और रिकॉर्ड के लिए आधुनिक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है जो औपचारिक भूमि अभिलेखों से ऐतिहासिक रूप से बाहर रहे हैं। इस अधिनियम से स्वामित्व को लेकर स्पष्टता आने, विवाद कम होने तथा बेहतर भूमि प्रशासन एवं नियोजित शहरी विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने बताया कि यह कदम शासन और नियामकीय सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा जीवन-यापन एवं कारोबार करने को आसान बनाना है।
उन्होंने कहा कि ये प्रावधान पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत अधिसूचनाओं के जरिये लागू किए गए हैं। यह चंडीगढ़ में उपयुक्त राज्य कानूनों को विस्तारित करने की स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है, क्योंकि चंडीगढ़ का अपना विधानमंडल नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि ये सभी कदम चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश में मौजूदा कानूनी ढांचे की कमियों को दूर करने, नियमन में अधिक स्पष्टता एवं समानता लाने, नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने तथा प्रभावी शासन को समर्थन देने का व्यापक प्रयास हैं।
केंद्र ने ये अधिसूचनाएं छह मई को जारी कीं। इन सुधारों में पंजाब राज्य के तीन कानूनों का विस्तार शामिल है।
भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2001 और 2003 संपत्तियों के मूल्यांकन और स्टाम्प शुल्क संग्रह के लिए मजबूत ढांचा पेश करते हैं। इनमें कम मूल्यांकन का पता लगाने और उसे सुधारने की स्पष्ट व्यवस्था भी शामिल है, जिससे संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और शुल्क चोरी की गुंजाइश कम होगी।
पंजाब आबादी देह (अधिकार अभिलेख) अधिनियम, 2021 उन आबादी क्षेत्रों में स्वामित्व अधिकारों के सर्वेक्षण और रिकॉर्ड के लिए आधुनिक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है जो औपचारिक भूमि अभिलेखों से ऐतिहासिक रूप से बाहर रहे हैं। इस अधिनियम से स्वामित्व को लेकर स्पष्टता आने, विवाद कम होने तथा बेहतर भूमि प्रशासन एवं नियोजित शहरी विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।