नई दिल्ली
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को पैसिफिक एयर फोर्स के कमांडर और US इंडो-पैसिफिक कमांड के एयर कंपोनेंट कमांडर जनरल केविन बी श्नाइडर के साथ बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा संकल्प व्यक्त किया गया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय जुड़ाव के दायरे का विस्तार करने और उसे ऑपरेशनल बनाने का स्पष्ट इरादा व्यक्त किया। X पर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के एक बयान के अनुसार, "CDS जनरल अनिल चौहान ने पैसिफिक एयर फोर्स के कमांडर और US इंडो-पैसिफिक कमांड के एयर कंपोनेंट कमांडर जनरल केविन बी श्नाइडर के साथ बातचीत की, जिसमें भारत और US के बीच बढ़ती रणनीतिक निकटता की पुष्टि की गई। चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक तथा उससे आगे शांति और स्थिरता को बनाए रखने के प्रति साझा संकल्प पर ज़ोर दिया गया।"
बयान में आगे कहा गया, "दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय और त्रि-सेवा जुड़ाव के दायरे, जटिलता और आवृत्ति का विस्तार करने और उन्हें ऑपरेशनल बनाने का स्पष्ट इरादा व्यक्त किया। आधुनिक शक्ति के एक निर्णायक कारक के रूप में प्रौद्योगिकी को पहचानते हुए, यह साझेदारी बेहतर तालमेल, क्षमता और रणनीतिक दूरदर्शिता के साथ लगातार विकसित हो रही है।" इससे पहले शुक्रवार को, श्नाइडर ने राष्ट्रीय राजधानी में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की, ताकि द्विपक्षीय रक्षा पहलों को आगे बढ़ाया जा सके और भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य-से-सैन्य सहयोग को गहरा किया जा सके।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चर्चाओं का मुख्य केंद्र संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से सहयोग बढ़ाना था। रक्षा मंत्रालय ने X पर साझा किए गए एक बयान में कहा, "पैसिफिक एयर फोर्सेज के कमांडर और US इंडो-पैसिफिक कमांड के एयर कंपोनेंट कमांडर जनरल केविन बी श्नाइडर ने आज नई दिल्ली में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की। चर्चाओं का मुख्य केंद्र रक्षा पहलों को आगे बढ़ाना और संयुक्त अभ्यासों, प्रशिक्षण दौरों तथा रणनीतिक आदान-प्रदान के माध्यम से सैन्य-से-सैन्य सहयोग को बढ़ाना था।"
यह बैठक दोनों देशों द्वारा अपनी सशस्त्र सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी तालमेल) को मजबूत करने और वायु, भूमि तथा समुद्री सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में जुड़ाव का विस्तार करने के निरंतर प्रयासों के बीच हुई है। पिछले एक दशक में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रक्षा संबंध काफी विस्तृत हुए हैं, जिसमें दोनों पक्ष तेजी से जटिल संयुक्त अभ्यासों और संस्थागत संवादों में भाग ले रहे हैं।