वैश्विक दबाव के बावजूद पूंजीगत खर्च जारी रहेगा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 01-05-2026
Capital expenditure to continue despite global pressure
Capital expenditure to continue despite global pressure

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उपजे राजकोषीय दबाव के बावजूद आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कायम रखने के लिए चालू वित्त वर्ष में निर्धारित 12.22 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय पर टिके रहने का फैसला किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
 
व्यय विभाग के सचिव वी. वुअलनाम ने कहा कि आने वाली कुछ तिमाहियां और आने वाला साल कई 'तनाव बिंदुओं’ से भरे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मार्च के अंत में पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से कर संग्रह पर असर पड़ सकता है।
 
वुअलनाम ने अशोका यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “राजकोषीय दबाव वास्तविकता है, लेकिन पूंजीगत व्यय हमारी प्राथमिकता रहेगा और हम इसे बजट स्तर पर बनाए रखने का प्रयास करेंगे।”
 
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजमार्ग, रेलवे, पोत परिवहन, बंदरगाह और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
 
सचिव ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध आयातक होने के कारण देश के समक्ष 'बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति' है।
 
उन्होंने कहा कि सरकार हालात से निपटने के लिए सक्रिय और लचीले ढंग से काम कर रही है, जबकि राजकोषीय सूझबूझ ने देश को मौजूदा अनिश्चितताओं में मजबूत स्थिति में रखा है।
 
बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि जीडीपी आकलन की नई शृंखला जारी होने के बाद अब यह 4.5 प्रतिशत माना जा रहा है।
 
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जो संघर्ष के पहले करीब 73 डॉलर थी।
 
ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती की है, जिससे राजकोष पर दबाव बढ़ा है। इस कटौती से 15 दिनों में करीब 7,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है।
 
व्यय सचिव ने कहा कि कर संग्रह की स्थिति पर भी करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इससे राजकोषीय गुंजाइश और सीमित हो सकती है।
 
उन्होंने बताया कि भारत अपनी एलपीजी खपत का 60 प्रतिशत आयात करता है और इसमें से 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से होती है। लेकिन इस समुद्री मार्ग के बंद होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।