तुर्कमान गेट पर भोर से पहले बुलडोज़र कार्रवाई, फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास तनाव

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-01-2026
Bulldozer action at Turkman Gate before dawn, tension around Faiz-e-Ilahi Mosque.
Bulldozer action at Turkman Gate before dawn, tension around Faiz-e-Ilahi Mosque.

 

नई दिल्ली |

पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में बुधवार तड़के उस समय तनाव फैल गया, जब नगर निगम (एमसीडी) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सदी पुरानी फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह तोड़फोड़ सुबह होने से पहले ही शुरू कर दी गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी फैल गई और कुछ जगहों पर पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एमसीडी की कार्रवाई पहले सुबह 8 बजे प्रस्तावित थी, लेकिन अचानक इसे करीब रात 1:30 बजे शुरू कर दिया गया। मौके पर कम से कम 17 अर्थमूवर मशीनें तैनात थीं और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। वीडियो फुटेज में बुलडोज़रों को मस्जिद परिसर से सटे कुछ ढांचों को गिराते हुए देखा गया।

पत्थरबाज़ी और आंसू गैस के आरोप

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तोड़फोड़ के दौरान कुछ “शरारती तत्वों” ने पत्थरबाज़ी की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। कुछ रिपोर्टों में आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की भी बात कही गई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने कहा,

“यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की गई। कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन हालात को तुरंत काबू में कर लिया गया और अब स्थिति सामान्य है।”

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब एक दिन पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति की याचिका पर नोटिस जारी किया था। याचिका में रामलीला मैदान और मस्जिद-कब्रिस्तान से सटी जमीन पर एमसीडी द्वारा अतिक्रमण बताए गए ढांचों को हटाने के फैसले को चुनौती दी गई है।

प्रबंधन समिति का कहना है कि संबंधित भूमि एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है, जिस पर वक्फ अधिनियम लागू होता है और इस तरह के विवादों पर सुनवाई का विशेष अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल को है। समिति ने यह भी दावा किया कि वह वक्फ बोर्ड को नियमित रूप से लीज़ रेंट का भुगतान कर रही है।

क्या रहेगा सुरक्षित, क्या हटेगा

एमसीडी ने 22 दिसंबर 2025 को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि 0.195 एकड़ (करीब 934 वर्ग गज) से बाहर बने सभी ढांचे अतिक्रमण माने जाएंगे। निगम का कहना है कि मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान का उपयोग बारातघर या क्लिनिक के रूप में नहीं किया जा सकता और ऐसा करना सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग है।

हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्री-इंडिपेंडेंस दौर की मूल मस्जिद, जो वक्फ संपत्ति है और 1940 में लीज़ पर दी गई थी, उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। कार्रवाई केवल उसी भूमि तक सीमित है, जो निर्धारित सीमा से बाहर बताई जा रही है।

संयुक्त सर्वे रिपोर्ट में बड़े अतिक्रमण का दावा

यह पूरा मामला एक संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट (JSR) से जुड़ा है, जो ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की शिकायत और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद तैयार की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि:

  • पीडब्ल्यूडी की लगभग 2,512 वर्गफुट सड़क और फुटपाथ पर कब्ज़ा है

  • पास के रामलीला मैदान की करीब 36,248 वर्गफुट भूमि पर कथित तौर पर बारातघर और निजी क्लिनिक चलाया जा रहा था

मस्जिद समिति ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि न तो कोई स्थायी बारातघर है और न ही अब कोई क्लिनिक चल रहा है। समिति के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता कीर्ति उप्पल, ने अदालत को बताया कि क्लिनिक की सेवाएं बंद कर दी गई हैं और अतिक्रमण हटाने पर समिति को कोई आपत्ति नहीं है—बस कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अगली सुनवाई अप्रैल में

न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने मामले को विचारणीय मानते हुए एमसीडी, डीडीए, एलएंडडीओ, पीडब्ल्यूडी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।फिलहाल, तुर्कमान गेट इलाके में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है—लेकिन भोर से पहले हुई इस कार्रवाई ने पुरानी दिल्ली की गलियों में एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज़ कर दी है।