BRICS economies must have say in global tax rules as negotiations shape cross-border taxation: FM Sitharaman
नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि अगले कुछ वर्षों में चल रही मल्टीलेटरल टैक्स बातचीत में लिए गए फैसले एक पीढ़ी के लिए क्रॉस-बॉर्डर टैक्स सिस्टम को तय करेंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि BRICS देशों को यह पक्का करना चाहिए कि उभरते हुए ग्लोबल टैक्स फ्रेमवर्क में उनकी राय भी शामिल हो। नई दिल्ली में BRICS टैक्स प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि इंटरनेशनल टैक्स सहयोग पर UN फ्रेमवर्क कन्वेंशन सहित कई मल्टीलेटरल प्रक्रियाओं के ज़रिए इंटरनेशनल टैक्स के नियमों पर फिर से बातचीत की जा रही है। उन्होंने कहा, "अगले कुछ वर्षों में इन प्रक्रियाओं में लिए गए फैसले एक पीढ़ी के लिए क्रॉस-बॉर्डर टैक्स सिस्टम को तय करेंगे।"
सीतारमण ने कहा कि BRICS देशों के पास - जो सोर्स ज्यूरिस्डिक्शन और बड़ी डेवलपिंग इकोनॉमी हैं और जिन्होंने कम बेस से काफी घरेलू टैक्स क्षमता बनाई है - इन बातचीत में रखने के लिए एक महत्वपूर्ण नज़रिया है। उन्होंने कहा, "BRICS देशों के पास - सोर्स ज्यूरिस्डिक्शन, बड़ी डेवलपिंग इकोनॉमी और कम बेस से काफी घरेलू टैक्स क्षमता बनाने वाले देशों के तौर पर - इन बातचीत पर एक नज़रिया है, जो इनकी निष्पक्षता और टिकाऊपन के लिए ज़रूरी है।" वित्त मंत्री ने कहा कि BRICS टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन के बीच सहयोग का मकसद ऐसे संस्थान और टूल बनाना है जो भारत की मौजूदा अध्यक्षता के बाद भी काम करते रहेंगे।
उन्होंने कहा, "ये वर्किंग ग्रुप इसलिए हैं क्योंकि इस कमरे में मौजूद हर देश ने इन समस्याओं का सामना किया है। वे एक ऐसा स्थायी संस्थागत माहौल बनाते हैं जिसमें इन पर प्रगति संभव हो पाती है। एक साल में नहीं, बल्कि समय के साथ, चाहे अध्यक्षता किसी के भी पास हो।" सीतारमण ने कहा कि इंटरनेशनल टैक्स और ट्रांसफर प्राइसिंग, और रेवेन्यू स्टैटिस्टिक्स पर नए वर्किंग ग्रुप का मकसद सदस्य देशों के सामने आने वाली आम चुनौतियों का समाधान करना है। उन्होंने टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में भारत के अनुभव पर भी प्रकाश डाला, जिसमें फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस ऑथेंटिकेशन और AI-इनेबल्ड टैक्सपेयर असिस्टेंस शामिल हैं।
उन्होंने BRICS टैक्स सहयोग से उभरने वाले मुख्य विषयों में से एक की पहचान करते हुए कहा, "टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को ज़्यादा सटीक, ज़्यादा सुलभ और व्यक्तियों की मनमानी शक्तियों पर कम निर्भर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी, डेटा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल।"
सीतारमण ने कहा कि BRICS टैक्स सहयोग टूल, टैक्स नॉलेज हब और क्रॉस-लर्निंग लैब को केवल पॉलिसी पहल के बजाय व्यावहारिक साधनों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "टैक्स सहयोग टूल, टैक्स नॉलेज हब और क्रॉस-लर्निंग लैब - ये सभी हमारे वर्किंग ग्रुप्स की लगातार कोशिशों से तैयार किए गए काम के साधन हैं।"
रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि प्रस्तावित 'इंटरनेशनल टैक्सेशन एंड ट्रांसफर प्राइसिंग वर्किंग ग्रुप' संधि की व्याख्या, ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट और टैक्स से जुड़े दूसरे तरीकों पर अनुभव साझा करने के लिए एक स्थायी BRICS प्लेटफॉर्म बनाएगा।
श्रीवास्तव ने कहा, "इंटरनेशनल टैक्सेशन एंड ट्रांसफर प्राइसिंग वर्किंग ग्रुप अनुभव साझा करने के लिए एक स्थायी BRICS प्लेटफॉर्म बनाता है।" उन्होंने आगे कहा कि मल्टीलेटरल टैक्स बातचीत में "हमारी सामूहिक आवाज़ की ज़रूरत है और अभी यह काफ़ी नहीं है"।