नई दिल्ली
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने बताया कि सिर्फ़ प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के बजाय चावल की रिकवरी (अनाज की प्राप्ति) में सुधार करने से मिल मालिकों की कमाई काफी बढ़ सकती है। टूटे हुए चावल के बजाय साबुत अनाज मिलने की दर में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी से 30,000 टन धान प्रोसेस करने वाली मिल की सालाना बिक्री में 60 लाख रुपये तक का इजाफा हो सकता है। यह अनुमान 20 रुपये प्रति किलोग्राम के संभावित कीमत अंतर और सुधार की लागत को शामिल किए बिना लगाया गया है। इस पर 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस' (BIRC) 2026 में चर्चा की जाएगी, जहाँ इंडस्ट्री मिलिंग मार्जिन और निवेश पर रिटर्न (मुनाफ़ा) बढ़ाने के तरीकों का आकलन करेगी।
BIRC 2026 (जो 23-25 अक्टूबर तक आयोजित होगा) के हिस्से के तौर पर, 24 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में "मुनाफ़े वाली राइस मिलिंग: लागत, योजना और मार्जिन में सुधार" विषय पर एक सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रोसेसिंग के तरीकों, प्लांट डिज़ाइन, रिकवरी, क्षमता के अंतर और ऑपरेटिंग लागत की समीक्षा की जाएगी।
IREF के वाइस प्रेसिडेंट (बासमती) और महावीर राइस मिल के डायरेक्टर दीपक गोयल ने कहा, "मौका सिर्फ़ ज़्यादा चावल प्रोसेस करने का नहीं है, बल्कि हर टन से ज़्यादा वैल्यू (मूल्य) हासिल करने का है।" उन्होंने आगे कहा, "हमें यह पता लगाने की ज़रूरत है कि नई मिलिंग क्षमता की असल में कहाँ ज़रूरत है और कहाँ बेहतर सुखाने की प्रक्रिया (ड्राइंग), रिकवरी, टेक्नोलॉजी या मौजूदा प्लांट के बेहतर इस्तेमाल से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है।" कॉन्फ्रेंस में 2026-27 के लिए एक मॉडल राइस मिल सेटअप की लागत का भी खुलासा किया जाएगा, जिसमें ज़मीन और सिविल काम, मशीनरी, स्टोरेज, ड्राइंग सिस्टम, बॉयलर, बिजली, पानी, वेस्ट मैनेजमेंट, पैकेजिंग, लैब और इंस्टॉलेशन शामिल होंगे। फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट, मौसमी वर्किंग कैपिटल और कुल फंडिंग की ज़रूरतों को अलग-अलग दिखाया जाएगा।
यह आकलन चावल की अनुमानित सालाना फसल के आधार पर किया गया है, जिसकी थोक कीमत लगभग 6 लाख करोड़ रुपये है। BIRC इस बात की समीक्षा करेगा कि अतिरिक्त मिलिंग क्षमता की असल में कहाँ ज़रूरत है और कहाँ मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने से बेहतर कमर्शियल फ़ायदा मिल सकता है। रिलीज़ में दिए गए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 में देश भर में लगभग 30,000 चावल मिलें चालू हालत में थीं। यह कॉन्फ्रेंस क्षमता के इस्तेमाल, टेक्नोलॉजी के मिश्रण और क्षेत्रीय मौजूदगी का विश्लेषण करेगी ताकि धान उत्पादन वाले उन इलाकों की पहचान की जा सके जहाँ सुविधाओं की कमी है, और साथ ही सुखाने, स्टोर करने, ग्रेडिंग और फिनिशिंग की सुविधाओं में मौजूद कमियों का पता लगाया जा सके।
इस कार्यक्रम में नियंत्रित तरीके से सुखाने और टेम्परिंग, ऑटोमेटेड हस्किंग और व्हाइटनिंग, ऑप्टिकल सॉर्टिंग और इन-लाइन क्वालिटी मॉनिटरिंग का भी आकलन किया जाएगा, ताकि अनावश्यक नुकसान को कम किया जा सके और काम में एकरूपता लाई जा सके।
इस सेशन के आखिर में विशेषज्ञों द्वारा किए गए तुलनात्मक विश्लेषण पेश किए जाने की उम्मीद है। इसमें धान की उपलब्धता, खरीदारों, यूटिलिटीज, रिकवरी, इस्तेमाल और फंडिंग के आधार पर यह बताया जाएगा कि व्यवसायों को कहाँ निवेश करना चाहिए, कहाँ विस्तार करना चाहिए, कहाँ अपग्रेड करना चाहिए और किन प्रोजेक्ट्स को कुछ समय के लिए टाल देना चाहिए।