बंगाल : बदलती सोच ने महिला वोट को नया रूप दिया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 05-05-2026
Bengal: Changing mindsets have reshaped the women's vote
Bengal: Changing mindsets have reshaped the women's vote

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
पश्चिम बंगाल में महिलाओं की चुनावी पसंद को नया आकार देने में अधिक आर्थिक सहायता राशि के वादे और मतदाताओं के रुझान में बदलाव ने संभवत: महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जिसके कारण विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से करारी हार का सामना करना पड़ा।
 
राज्य के मतदाताओं में से लगभग आधी संख्या महिलाओं की है और उन्हें लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की एक मजबूत ताकत माना जाता रहा है।
 
तृणमूल कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले 'लक्ष्मीर भंडार' योजना के तहत वित्तीय सहायता बढ़ा दी जिसे सत्तारूढ़ पार्टी का महिलाओं के लिए राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली कल्याणकारी कार्यक्रम माना जाता था। सामान्य वर्ग के लिए यह सहायता 1,500 रुपये प्रति माह और आरक्षित वर्ग के लिए 1,700 रुपये प्रति माह कर दी गई।
 
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में प्रस्तावित 'अन्नपूर्णा' योजना के तहत 3,000 रुपये की मासिक सहायता देने का वादा किया था जिससे संभव है कि तृणमूल की महिला मतदाताओं के बीच उसकी उल्लेखनीय पैठ बनी।
 
तृणमूल कांग्रेस ने 2011 से ही चुनाव में महिला मतदाताओं की अधिक भागीदारी पर जोर दिया है।
 
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, इस वर्ष के पहले चरण के मतदान में 152 निर्वाचन क्षेत्रों में महिलाओं की मतदान दर 92.69 प्रतिशत रही, जो पुरुषों की 90.92 प्रतिशत मतदान दर से अधिक है।
 
हालांकि, दूसरे चरण के मतदान के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं जिसमें 142 सीट पर मतदान हुआ था।
 
नाम गुप्त रखने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘‘हम विभिन्न क्षेत्रों से आंकड़े एकत्र कर रहे हैं। विस्तृत मतदानोत्तर विश्लेषण के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।’’
 
तृणमूल के एक नेता ने कहा कि सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों से इस रुझान में बदलाव के संकेत मिले हैं।
राज्य के मतदाताओं में से लगभग आधी संख्या महिलाओं की है और उन्हें लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की एक मजबूत ताकत माना जाता रहा है।
 
तृणमूल कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले 'लक्ष्मीर भंडार' योजना के तहत वित्तीय सहायता बढ़ा दी जिसे सत्तारूढ़ पार्टी का महिलाओं के लिए राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली कल्याणकारी कार्यक्रम माना जाता था। सामान्य वर्ग के लिए यह सहायता 1,500 रुपये प्रति माह और आरक्षित वर्ग के लिए 1,700 रुपये प्रति माह कर दी गई।
 
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में प्रस्तावित 'अन्नपूर्णा' योजना के तहत 3,000 रुपये की मासिक सहायता देने का वादा किया था जिससे संभव है कि तृणमूल की महिला मतदाताओं के बीच उसकी उल्लेखनीय पैठ बनी।
 
तृणमूल कांग्रेस ने 2011 से ही चुनाव में महिला मतदाताओं की अधिक भागीदारी पर जोर दिया है।
 
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, इस वर्ष के पहले चरण के मतदान में 152 निर्वाचन क्षेत्रों में महिलाओं की मतदान दर 92.69 प्रतिशत रही, जो पुरुषों की 90.92 प्रतिशत मतदान दर से अधिक है।
 
हालांकि, दूसरे चरण के मतदान के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं जिसमें 142 सीट पर मतदान हुआ था।
 
नाम गुप्त रखने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘‘हम विभिन्न क्षेत्रों से आंकड़े एकत्र कर रहे हैं। विस्तृत मतदानोत्तर विश्लेषण के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।’’
 
तृणमूल के एक नेता ने कहा कि सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों से इस रुझान में बदलाव के संकेत मिले हैं।