बैंकों को संकटग्रस्त एमएसएमई, छंटनी के जोखिम वाले व्यक्तिगत कर्जदारों से दूरी बनानी चाहिए: ईवाई

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 07-04-2026
Banks should distance themselves from distressed MSMEs and individual borrowers at risk of layoffs: EY
Banks should distance themselves from distressed MSMEs and individual borrowers at risk of layoffs: EY

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच परामर्शदाता कंपनी ईवाई ने मंगलवार को बैंकों को सलाह दी कि वे संकटग्रस्त सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और छंटनी के जोखिम का सामना कर रहे व्यक्तिगत कर्जदारों से अपना निवेश या जोखिम कम करें।
 
ईवाई ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि बैंकों को जोखिम के शुरुआती संकेतों को पहचानकर निर्णायक कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
 
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इसका अर्थ यह हो सकता है कि बैंक कमजोर एमएसएमई खंडों, आयात पर अत्यधिक निर्भर कर्जदारों और उन व्यक्तिगत ग्राहकों से अपना जोखिम हटा लें, जिन पर छंटनी की तलवार लटक रही है। इसके बजाय बैंकों को संरचनात्मक रूप से मजबूत क्षेत्रों और सुरक्षित पोर्टफोलियो पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’’
 
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बैंकों को पुनर्गठन और नकदी सुरक्षा भंडार जैसे उपायों के जरिये शुरुआती हस्तक्षेप पर ध्यान देना चाहिए।
 
ईवाई ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव, लॉजिस्टिक में व्यवधान और मांग में अस्थिरता जैसे झटकों का आकलन करने के लिए एक साथ कई कारकों को ध्यान में रखकर तनाव का स्तर परखा जाना चाहिए।
 
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इस दृष्टिकोण को अपनाने से जोखिम प्रबंधन केवल संकट को रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उस पर सक्रिय नियंत्रण स्थापित होगा। इससे परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत होगी और ऋण की लागत सीमित रहेगी।’’
 
ईवाई के अनुसार, संघर्ष का घरेलू प्रभाव आपूर्ति श्रृंखला में नकदी की खपत के रूप में दिखाई दे रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत और लंबे समय तक माल फंसने के कारण कंपनियां बैंक से मिलने वाली नकद ऋण सीमा (कैश क्रेडिट) या खाते से अतिरिक्त पैसा निकालने (ओवरड्राफ्ट) की सुविधा पर अधिक निर्भर हो रही हैं।"
 
रिपोर्ट में विशेष रूप से कपड़ा, रसायन, लॉजिस्टिक और विमानन क्षेत्रों में काम करने वाले निर्यात-उन्मुख एमएसएमई का जिक्र किया गया है, जो मुनाफे में कमी और नकदी के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।
 
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो उस क्षेत्र (पश्चिम एशिया) में नौकरियों का नुकसान हो सकता है, जिससे भारत भेजे जाने वाले धन में कमी आएगी।
 
इसका असर केरल, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे विदेशी कमाई पर निर्भर राज्यों के परिवारों पर पड़ सकता है।
 
ईवाई ने सुझाव दिया कि बैंकों को अपनी ‘शुरुआती चेतावनी प्रणाली’ को और बेहतर बनाना चाहिए, ताकि किसी खाते के कर्ज न चुका पाने की स्थिति आने से 60-90 दिन पहले ही संभावित संकट की पहचान की जा सके।