आयुर्वेद स्वस्थ भविष्य के लिए समग्र कल्याण को बढ़ावा देता है: NTR कलेक्टर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 19-09-2026
Ayurveda promotes holistic well-being for healthy future: NTR Collector
Ayurveda promotes holistic well-being for healthy future: NTR Collector

 

विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) 
 
NTR ज़िला कलेक्टर लक्ष्मी शा ने शनिवार को विजयवाड़ा कलेक्ट्रेट में AYUSH विभाग द्वारा आयोजित एक जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने आयुर्वेद के महत्व और संपूर्ण स्वास्थ्य व स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर ज़ोर दिया। इस मौके पर बोलते हुए लक्ष्मी शा ने कहा कि आयुर्वेद को केवल बीमार पड़ने पर इलाज के तरीके के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे स्वस्थ जीवन, जीवनशैली की आदतों और व्यक्तियों व समाज की समग्र भलाई को शामिल करने वाले एक संपूर्ण नज़रिए के तौर पर देखा जाना चाहिए।
 
लक्ष्मी शा ने कहा, "आयुर्वेद सिर्फ़ बीमारी होने पर किया जाने वाला इलाज नहीं है। यह एक संपूर्ण नज़रिया है जो अच्छी जीवनशैली अपनाने और सेहत बनाए रखने से लेकर आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन और पर्यावरण देने तक हर चीज़ पर ध्यान देता है।" उन्होंने कहा कि आयुर्वेद ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में इलाज के सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों में से एक है। उन्होंने इस साल की थीम 'स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद' (Ayurveda for a Healthy Tomorrow) का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह संपूर्ण भलाई के महत्व की याद दिलाती है।
 
उन्होंने कहा, "आयुर्वेद ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में इलाज का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है। इस साल की थीम 'स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद' हमें याद दिलाती है कि हमारा भविष्य संपूर्ण भलाई पर निर्भर करता है।" कलेक्टर ने आयुर्वेद से जुड़ी पारंपरिक जानकारी पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत ने पीढ़ियों से इस प्रणाली को संजोकर रखा है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने चिकित्सा की पारंपरिक प्रणाली और स्वास्थ्य सेवा में इसके योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल आयुर्वेद के लिए एक खास दिन मनाने का फ़ैसला किया है।
 
साथ ही, सबूत-आधारित और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की ज़रूरत के साथ-साथ चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों के बारे में जागरूकता पर भी तेज़ी से चर्चा हो रही है। AYUSH मंत्रालय एक रिसर्च पोर्टल चलाता है जिसमें आयुर्वेद और अन्य AYUSH प्रणालियों पर सबूत-आधारित रिसर्च मौजूद है। इसने इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर (एकीकृत स्वास्थ्य सेवा) के तरीकों की जांच के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर रिसर्च भी की है। इस तरह के नज़रिए का मतलब यह नहीं है कि पारंपरिक चिकित्सा को अपने-आप पारंपरिक मेडिकल इलाज की जगह ले लेनी चाहिए। AYUSH मंत्रालय का फ़ार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम AYUSH दवाओं की सुरक्षा और बुरे असर की निगरानी के महत्व पर भी ज़ोर देता है और इस सोच के ख़िलाफ़ चेतावनी देता है कि "प्राकृतिक" बताए जाने वाले उत्पाद ज़रूरी तौर पर सुरक्षित होते हैं।
 
यह जागरूकता रैली AYUSH विभाग की उन कोशिशों के तहत आयोजित की गई थी जिनका मकसद जनता के बीच आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली और बचाव-आधारित स्वास्थ्य सेवा के बारे में जागरूकता फैलाना था। आयुष विभाग से जुड़े अधिकारियों और प्रतिभागियों ने विजयवाड़ा कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।