आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में प्रवेश पाने के लिए चुनावी मैदान में उतरी 59 महिला उम्मीदवारों में से केवल सात ही सफलता पा सकीं, जो आंकड़ा 2021 में चुनकर आयी विधानसभा में भी समान था।
नयी विधानसभा में, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की छह महिला विधायक होंगी, जबकि विपक्षी कांग्रेस के पास एक महिला विधायक होगी। राज्य के कुल 2.50 करोड़ मतदाताओं में महिलाओं का 49.98 प्रतिशत है।
भाजपा की महिला विधायकों की संख्या बढ़ाकर चार हो गई है, जबकि उसके सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के पास एक-एक महिला विधायक होंगी। कांग्रेस द्वारा मैदान में उतारी गई 14 महिला उम्मीदवारों में से, जो सभी पार्टियों में सबसे अधिक थीं, केवल एक ही जीत हासिल कर सकी।
राजग ने 126 सदस्यीय विधानसभा में रिकॉर्ड 102 सीटें जीतने के साथ दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लगातार तीसरी बार असम में सरकार बनाने की तैयारी कर ली है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष का प्रदर्शन हाल के समय में सबसे खराब रहा है।
भाजपा ने जिन 90 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 82 पर जीत हासिल की, जबकि उसके सहयोगी दलों बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (अगप) ने 10-10 सीटें जीतीं।
बीपीएफ ने 11 सीटों और अगप ने 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
चुनाव जीतने वाली सबसे प्रमुख महिला उम्मीदवार राज्य की वित्त मंत्री अजंता निओग हैं, जिन्होंने लगातार छठी बार गोलाघाट निर्वाचन क्षेत्र से अपनी सीट बरकरार रखी।
चुनाव जीतने वाली अन्य भाजपा उम्मीदवारों में मंगलदोई से महिला मोर्चा की राज्य इकाई प्रमुख नीलिमा देवी और दिफू से निसो तेरांगपी शामिल हैं।
निवर्तमान मंत्रिमंडल में भाजपा की एक अन्य मंत्री नंदिता गारलोसा ने टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस का दामन थामा और हाफलॉग से चुनाव लड़ा, लेकिन वह भाजपा की नवोदित उम्मीदवार रूपाली लंगथासा से हार गईं।
अगप की दीप्तिमयी चौधरी ने बोंगाईगांव सीट बरकरार रखी, जबकि बीपीएफ की सेवली मोहिलारी, जो बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी) प्रमुख हाग्रामा मोहिलारी की पत्नी हैं, ने कोकराझाड़ से जीत हासिल की।