केरल में उभरते खतरे पर बोले अमित शाह, क्या एसडीपीआई और जमात-ए-इस्लामी से राज्य सुरक्षित रहेगा ?

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 11-01-2026
Amit Shah spoke on the emerging threat in Kerala, asking,
Amit Shah spoke on the emerging threat in Kerala, asking, "Will the state be safe with SDPI and Jamaat-e-Islami?"

 

तिरुवनंतपुरम,

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को चेतावनी दी कि केरल में फिलहाल कानून-व्यवस्था की स्थिति शांत दिख सकती है, लेकिन ‘‘कई खतरे धीरे-धीरे उभर रहे हैं’’ जो भविष्य में खतरनाक रूप ले सकते हैं।शाह ने यह बात मलयालम समाचार पत्र ‘केरल कौमुदी’ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कही और राज्य में कुछ संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने केरल की जनता से पूछा कि क्या पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया), जमात-ए-इस्लामी जैसी संस्थाएं और एसडीपीआई (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) जैसी राजनीतिक पार्टियां राज्य को सुरक्षित रख सकती हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “जो लोग सह-अस्तित्व में विश्वास नहीं रखते, वे एकता कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं?” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे खतरे की पहचान करना और उन्हें खत्म करने के प्रयास करना सरकार की जिम्मेदारी है। शाह ने पीएफआई पर लगे प्रतिबंध का जिक्र करते हुए कहा कि इस फैसले से पूरे देश की सुरक्षा बढ़ी, और इसके कैडर को सलाखों के पीछे डालने से खतरे कम हुए।

शाह ने चेताया कि केरल की सुरक्षा केवल ‘‘पर्दे के पीछे काम कर रहे अदृश्य खतरों’’ की पहचान करके सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा, “विकसित केरल के साथ-साथ सुरक्षित केरल भी महत्वपूर्ण है।”

इस टिप्पणी के कुछ दिन पहले भाजपा के केरल इकाई प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ में शामिल आईयूएमएल और जमात-ए-इस्लामी पर राज्य में भाजपा को रोकने के लिए धर्म का इस्तेमाल करके ‘खतरनाक राजनीति’ करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का ध्यान युवाओं के विकास या रोजगार पर नहीं, बल्कि केरल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने पर केंद्रित है।

शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और सुरक्षा व कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर बहस बढ़ रही है। उन्होंने जनता से सीधे सवाल पूछकर राज्य में सुरक्षा और शांति के महत्व पर जोर दिया।

इस प्रकार शाह ने केरल में उभरते खतरे, संगठनों की भूमिका और राज्य की सुरक्षा पर गंभीर चेतावनी दी और सरकार की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।