अमित शाह बोले: देश जल्द होगा नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 31-03-2026
Amit Shah Says: The Country Will Soon Be Completely Free from Naxalism
Amit Shah Says: The Country Will Soon Be Completely Free from Naxalism

 

नई दिल्ली।

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब नक्सली हिंसा में शामिल लोगों के दिन खत्म हो चुके हैं और देश जल्द ही पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त होने जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बदलाव केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नहीं, बल्कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, विकास योजनाओं और समन्वित रणनीति का परिणाम है।

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि वामपंथी उग्र विचारधारा है, जिसने वर्षों तक आदिवासियों को गुमराह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलियों और उनके समर्थकों ने निर्दोष आदिवासियों के सामने यह झूठा नैरेटिव पेश किया कि वे उनके अधिकारों और न्याय के लिए लड़ रहे हैं, जबकि असल में उनका उद्देश्य हिंसा के जरिए सत्ता हासिल करना था।

Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि 2014 के बाद देश में विकास की गति तेज हुई है और इसका असर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी दिख रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर जैसे इलाकों में अब स्कूल, सड़कें, मोबाइल टावर, बैंकिंग सुविधाएं और राशन की दुकानें तेजी से स्थापित हो रही हैं। पहले जहां “रेड टेरर” का साया था, वहां अब विकास पहुंच रहा है।

शाह ने कहा कि नक्सलवाद इसलिए नहीं फैला कि विकास नहीं था, बल्कि विकास इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि वहां नक्सलियों का कब्जा था। उन्होंने बताया कि 2014 में जहां 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, अब उनकी संख्या घटकर केवल दो रह गई है। इसके अलावा नक्सल हिंसा की घटनाओं और प्रभावित पुलिस थानों में भी भारी कमी आई है।

उन्होंने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सीआरपीएफ, कोबरा कमांडो, राज्य पुलिस और स्थानीय आदिवासियों के सहयोग से यह सफलता हासिल हुई है। पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों नक्सली मारे गए, हजारों गिरफ्तार हुए और बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण भी किया। सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों के लिए पुनर्वास नीति भी लागू की है, जिसके तहत आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है—जो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आना चाहता है, उससे बातचीत होगी, लेकिन जो बंदूक उठाएगा, उसे उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी और “अर्बन नक्सल” नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं, लेकिन सुरक्षा बलों के शहीद जवानों और पीड़ित नागरिकों के प्रति उनकी संवेदनाएं नहीं दिखतीं।

शाह ने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि नक्सल आंदोलन 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ और धीरे-धीरे 12 राज्यों में फैल गया। उन्होंने कहा कि यह विस्तार बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं था। उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद वे नक्सल समस्या का समाधान नहीं कर सके।

अंत में गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने सुरक्षा, विकास और संवाद—तीनों स्तरों पर काम किया है और अब देश नक्सलवाद के अंतिम चरण में है। उन्होंने विश्वास जताया कि बहुत जल्द भारत पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा और यह उपलब्धि देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।