राकांपा नेता की हत्या के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को उम्रकैद

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-04-2026
Amit Jogi, son of former Chief Minister Ajit Jogi, has been sentenced to life imprisonment in the murder case of an NCP leader.
Amit Jogi, son of former Chief Minister Ajit Jogi, has been sentenced to life imprisonment in the murder case of an NCP leader.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रामअवतार जग्गी की हत्या के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र और पूर्व विधायक अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रामावतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
 
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद उच्च न्यायालय ने पिछले महीने इस मामले में फिर से सुनवाई शुरू की थी।
 
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने दो अप्रैल को अमित जोगी को बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया तथा उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। निचली अदालत ने 2007 में अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था।
 
आदेश की प्रति सोमवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई।
 
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है ‘‘हमारी यह सुविचारित राय है कि निचली अदालत द्वारा आरोपी-अमित जोगी को बरी करते हुए दिया गया फैसला स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी, गलत, विकृत, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सबूतों के विपरीत और बिना किसी ठोस आधार के है। ’’
 
आदेश में कहा गया है कि आरोपी-अमित जोगी को बरी करने के संबंध में माननीय विशेष न्यायाधीश (अत्याचार), रायपुर द्वारा दिया गया फैसला, रद्द किया जाता है। आदेश के अनुसार, आरोपी-अमित जोगी को भी दोषी ठहरा कर वही सज़ा देना चाहिए जो अन्य दोषियों, यानी चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी को दी गई है।
 
आदेश में कहा गया है, ''आरोपी-अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी को दोषी ठहराया जाता है और आईपीसी की धारा 120-बी के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 302 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी घोषित ठहराया जाता है। उसे आजीवन कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी जाती है, और जुर्माना न देने पर, उसे छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।''
 
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता जग्गी की हत्या चार जून, 2003 को हुई थी, जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी और बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया, जिसने अमित जोगी समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए।
 
31 मई, 2007 को रायपुर की एक निचली अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।
 
बाद में सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने 2011 में देरी के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी। छत्तीसगढ़ सरकार और रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग अपीलें भी खारिज कर दी गईं।
 
पिछले साल नवंबर में, उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कहा कि वह अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर फिर से विचार करे। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उच्च न्यायालय ने पिछले माह इस मामले को पुन: खोला।