अहमदाबाद
गुजरात के अहमदाबाद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। अहमदाबाद नगर निगम ने मियावाकी पद्धति से महज एक घंटे में 3.61 लाख पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक अभियान में 25 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया और शहर को हरित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
यह विशाल पौधारोपण अभियान अहमदाबाद के भदाज क्षेत्र में लगभग 76 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में आयोजित किया गया। इस दौरान 35 प्रकार की देशी प्रजातियों के 3 लाख 61 हजार पौधे लगाए गए। नगर निगम का कहना है कि स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने से शहरी जैव विविधता मजबूत होगी और आने वाले वर्षों में शहर का पर्यावरण अधिक संतुलित बनेगा।
यह अभियान केवल एक विश्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। इसे व्यापक हरित विकास योजना का हिस्सा माना जा रहा है। इस योजना के तहत गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में कुल 1.25 करोड़ और अहमदाबाद नगर निगम क्षेत्र में 50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ेगा, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री तथा गांधीनगर से सांसद अमित शाह के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, शहरी विकास एवं आवास मंत्री, अहमदाबाद के महापौर, मुख्य सचिव, नगर आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
पौधारोपण अभियान को सफल बनाने में विभिन्न सरकारी और सामाजिक संस्थाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। अहमदाबाद नगर निगम के कर्मचारियों के अलावा स्कूल बोर्ड के प्रतिनिधि, बीएपीएस के स्वयंसेवक, क्रेडाई के सदस्य, पुलिसकर्मी, एनसीसी कैडेट, गैर सरकारी संगठन, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने इसमें भाग लिया। सामूहिक भागीदारी ने इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दे दिया।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार मियावाकी पद्धति कम समय में घने और प्राकृतिक जंगल विकसित करने की प्रभावी तकनीक मानी जाती है। इस पद्धति में देशी पौधों को सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे वे तेजी से विकसित होते हैं और सामान्य पौधारोपण की तुलना में अधिक जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई शहर शहरी हरियाली बढ़ाने के लिए इस तकनीक को अपना रहे हैं।
अहमदाबाद नगर निगम ने कहा कि यह उपलब्धि केवल गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। देशी प्रजातियों के पौधे भविष्य में प्रदूषण कम करने, तापमान नियंत्रित रखने, वन्य जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करने में मदद करेंगे।
इस रिकॉर्ड के साथ अहमदाबाद ने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और सतत शहरी विकास की दिशा में भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के जनभागीदारी आधारित अभियान देश के अन्य शहरों में भी चलाए जाएं तो हरित भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकता है।