आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली 67 प्रतिशत से अधिक महिलाओं का मानना है कि उनके कार्यस्थलों में वेतन समानता मौजूद है, जबकि 33 प्रतिशत महिलाओं को लगता है कि वेतन में अंतर है। नौकरी डॉट कॉम की शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
'व्हाट वीमेन प्रोफेशनल्स वांट' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट देश के 50 से अधिक उद्योगों की 50,000 महिलाओं के बीच किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है।
रिपोर्ट के अनुसार, 67 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके कार्यस्थलों पर वेतन समानता है, जबकि 33 प्रतिशत ने माना कि वहां समानता नहीं है। वेतन में अंतर होने की बात रियल एस्टेट (42 प्रतिशत) के पेशेवरों ने सबसे दृढ़ता से कही, जिसके बाद एफएमसीजी (38 प्रतिशत), दवा और जीवन विज्ञान (38 प्रतिशत) और वाहन (37 प्रतिशत) क्षेत्र का स्थान रहा।
रिटेल (35 प्रतिशत), होटल एवं रेस्तरां (35 प्रतिशत), आईटी सेवाएं (34 प्रतिशत), टेलीकॉम (34 प्रतिशत), चिकित्सा सेवा (33 प्रतिशत) और तेल एवं गैस क्षेत्र (33 प्रतिशत) की महिलाओं ने भी माना कि वेतन में असमानता या अंतर मौजूद है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर जारी इस रिपोर्ट में समान वेतन ऑडिट और मासिक धर्म अवकाश की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला गया है। उच्च वेतन श्रेणी वाले पेशेवरों में यह मांग सबसे अधिक देखी गई।