Health insurance companies should be prosecuted for unfairly rejecting claims: Ranjit Ranjan
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की कथित मनमानी और इसकी वजह से बीमा कराने वाले को होने वाली परेशानी पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस की एक सदस्य ने मांग की कि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के दिशा निर्देशों का कठोर एवं अनिवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए एवं अनुचित तरीके से दावा ठुकराने पर बीमा कंपनी पर कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस की रंजीत रंजन ने शून्यकाल के दौरान स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की कथित मनमानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई दावे विभिन्न तकनीकी कारणों या मामूली वजहों से खारिज कर दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार दस्तावेज पूरे होने पर भी दावा खारिज किया जाता है, कभी कह दिया जाता है कि यह बीमारी दावा करने वाले को पहले से ही थी। उन्होंने कहा, ‘‘इससे मरीज और उसके परिजन संकट के समय में आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं।’’
रंजन ने कहा कि कंपनियां डॉक्टर से ज्यादा नहीं जानतीं, फिर भी वह दावा खारिज करने के लिए ऊटपटांग तर्क देती हैं। ऐसी कंपनियां एक तरह से आम लोगों का ‘‘दुरूपयोग’’ कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह अमानवीय प्रवृत्ति है। दस्तावेज पूरे मांगे जाते हैं लेकिन विचित्र बहाने बना कर दावे खारिज कर दिए जाते हैं। यह अन्याय है।’’
उन्होंने कहा कि व्यक्ति स्वास्थ्य बीमा इसलिए कराता है ताकि उसके बुरे वक्त में उसका ही पैसा काम आ जाए और उसे किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। ‘‘लेकिन बीमा कंपनियां बड़ी बड़ी बातें करती हैं, पॉलिसी लेते समय कई दस्तावेज ले लेती हैं और बाद में मामूली बातों का तर्क दे कर दावा खारिज कर देती हैं।’’
रंजन ने मांग की कि इरडा के दिशा निर्देशों का कठोर एवं अनिवार्य अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा अनुचित तरीके से दावा ठुकराने पर बीमा कंपनी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि दावा प्रक्रिया पारदर्शी सरल और सुगम होनी चाहिए।