क्या सोशल मीडिया पर पाबंदी से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है?

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 17-10-2026
Can banning social media improve children's mental health?
Can banning social media improve children's mental health?

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
सोशल मीडिया मंचों के लिए वर्ष 2026 खर्चीला साबित हुआ है। मार्च से अब तक यूट्यूब, और इंस्टाग्राम एवं फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने कई मुकदमों में समझौता किया है या हर्जाने के रूप में 17 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम चुकाई है।

इन मुकदमों में आरोप लगाया गया कि कंपनियों ने लापरवाही बरती, जानबूझकर ऐसा डिजाइन तैयार किया, जिससे बच्चों को सोशल मीडिया की लत लग जाये तथा सुरक्षा और निजता के बारे में जनता को गुमराह किया। यदि इन मुकदमों को इस बात का संकेत माना जाये कि सरकारें और आम लोग सोशल मीडिया मंचों को किस नजरिए से देखने लगे हैं, तो आने वाले समय में ऐसे और भी मुकदमे सामने आ सकते हैं।
 
इन मुकदमों के अलावा, सोशल मीडिया मंचों को कारोबार में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध तेजी से बढ़ रहे हैं और दुनियाभर में लगाये जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया उन पहले देशों में शामिल था, जिसने दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया। इसके कुछ ही समय बाद ब्रिटेन ने भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू कर दिया।
 
फिलहाल, इन सोशल मीडिया मंचों पर नाबालिग उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे देशों की संख्या 20 से अधिक हो गई है। इनमें यूनान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कनाडा जैसे देश शामिल हैं।